॥ सिद्धि विनायक मन्त्र ॥
विनियोग:ॐ ह्रीं क्लीं वीरवर गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट्।
ध्यान:ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्व गुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।
मुख्य मंत्र:
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्वराज्य वश्य-करणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुषाकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा।
विनियोग:ॐ ह्रीं क्लीं वीरवर गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट्।
ध्यान:ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्व गुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।
मुख्य मंत्र:
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्वराज्य वश्य-करणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुषाकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा।
॥ अर्थ ॥
ॐ, मैं सिद्धि प्रदान करने वाले विनायक को नमन करता हूँ। जो सभी कार्य करने वाले हैं, सभी विघ्नों को शांत करने वाले हैं, सभी राज्यों को वश में करने वाले हैं और सभी लोगों, स्त्रियों और पुरुषों को आकर्षित करने वाले हैं। श्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ, मैं सिद्धि प्रदान करने वाले विनायक को नमन करता हूँ। जो सभी कार्य करने वाले हैं, सभी विघ्नों को शांत करने वाले हैं, सभी राज्यों को वश में करने वाले हैं और सभी लोगों, स्त्रियों और पुरुषों को आकर्षित करने वाले हैं। श्रीं ॐ स्वाहा।
उत्पत्ति एवं महत्व
सिद्धि विनायक मंत्र भगवान गणेश के 'सिद्धि विनायक' स्वरूप को समर्पित है, जो सभी प्रकार की 'सिद्धि' अर्थात सफलता, निपुणता और आध्यात्मिक शक्तियों को प्रदान करने वाले हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ मंत्र माना गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि साधक लोग किसी भी अन्य कठिन साधना को आरम्भ करने से पूर्व इस मंत्र को सिद्ध करते हैं। ऐसा करने से उनकी मुख्य साधना में सफलता सुनिश्चित होती है और साधना-काल में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होती। यह मंत्र एक सुरक्षा कवच और सफलता की कुंजी के रूप में कार्य करता है।
साधना से पूर्व उपयोगी मंत्र
मुख्य सिद्धि विनायक मंत्र के अतिरिक्त, ग्रंथों में साधना को निर्विघ्न बनाने के लिए कुछ अन्य सहायक मंत्रों का भी उल्लेख है, जिनका प्रयोग साधक अपनी साधना की शुरुआत में कर सकते हैं:
विनियोग मंत्र:
ॐ ह्रीं क्लीं वीरवर गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट्।
ॐ ह्रीं क्लीं वीरवर गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट्।
ध्यान मंत्र:
ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्व गुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।
ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्व गुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः।
मुख्य मंत्र का शब्दशः अर्थ
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय: ॐ, मैं सिद्धि प्रदान करने वाले विनायक को नमन करता हूँ।
सर्वकार्यकर्त्रे: सभी कार्यों को करने वाले या कराने वाले।
सर्वविघ्न प्रशमनाय: सभी विघ्नों को शांत करने वाले।
सर्वराज्य वश्य-करणाय: सभी राज्यों को वश में करने की शक्ति देने वाले।
सर्वजन सर्वस्त्री पुरुषाकर्षणाय: सभी जनों, स्त्रियों और पुरुषों को आकर्षित करने की शक्ति देने वाले।
श्रीं: यह देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र है, जो धन और समृद्धि का प्रतीक है।
ॐ स्वाहा: मैं यह सम्पूर्ण ऊर्जा ब्रह्म को समर्पित करता हूँ।
मंत्र जाप के विविध फल
दैनिक सफलता
प्रतिदिन 108 बार जाप करने से दिन भर के सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
निर्भय यात्रा
यात्रा के दौरान जाप करने से मार्ग का भय समाप्त होता है और यात्रा सफल होती है।
स्मरण शक्ति में वृद्धि
इस मंत्र के जाप से स्मरण शक्ति (memory power) तीव्र होती है।
शीघ्र विवाह और समृद्धि
अविवाहितों का शीघ्र विवाह होता है और आर्थिक अभाव वाले व्यक्ति संपन्न हो जाते हैं।
वाक् सिद्धि की प्राप्ति
100 दिन तक सायंकाल 1000 जाप करने से वाक् सिद्धि (जो कहा जाए, वह सत्य हो) प्राप्त होती है।
कुबेर के समान धन
आक की जड़ के गणपति के समक्ष 24 दिन तक 5000 जाप करने से व्यक्ति कुबेर के समान धनपति हो जाता है।
मंत्र सिद्धि की विशेष विधियाँ
इस मंत्र को सिद्ध करने की कई विधियाँ शास्त्रों में वर्णित हैं:
1. सामान्य अनुष्ठान (24 दिन)
- साधना में लाल वस्त्र पहनें और मस्तक पर रक्त चंदन का त्रिपुंड लगाएं।
- 24 दिनों में सवा लाख (1,25,000) मंत्र जाप पूरे करने का संकल्प लें।
- जाप के बाद मंत्र संख्या का दशम भाग (12,500) से यज्ञ में आहुति दें।
- साधना काल में भूमि पर शयन करें।
2. शीघ्र सिद्धि विधि (7 दिन)
- कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर स्वयं गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
- उस प्रतिमा के सामने नित्य एक हजार (1000) बार मंत्र जाप करें।
- इस विधि से सात दिनों में मंत्र सिद्ध हो जाता है।
3. कुबेर धन प्राप्ति विधि (24 दिन)
- सफ़ेद आक (श्वेतार्क) की जड़ से गणपति की प्रतिमा बनाएं।
- प्रतिमा के सामने नित्य पांच हजार (5000) बार मंत्र जाप करें।
- यह अनुष्ठान 24 दिनों तक करें। इससे साधक कुबेर के समान धनवान हो जाता है।
