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शक्ति विनायक मंत्र (ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं) अर्थ, लाभ और सिद्धि विधि

॥ Shakti Vinayak Mantra ॥

शक्ति विनायक मंत्र (ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं): अर्थ, लाभ और सिद्धि विधि
॥ शक्ति विनायक मन्त्र ॥

विनियोग:ॐ अस्य शक्तिगणाधिपमंत्रस्य भार्गव ऋषिः, विराट् छंद, शक्तिगणाधिपो देवता, श्रीं बीजम्, ह्रीं शक्तिः, ममाभीष्टसिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान:विषाणां कुशावक्षसूत्रं च पाशं।
दधानं करैर्मोदकं पुष्करेण॥
स्वपत्न्यायुतं हेमभूषामराढ्यं।
गणेशं समुद्गादिनेशाममीडे॥
मंत्र:ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं।
॥ अर्थ ॥

मैं ब्रह्मांडीय चेतना (ॐ), महामाया शक्ति (ह्रीं), और विघ्नहर्ता गणेश (ग्रीं) की संयुक्त ऊर्जा का आवाहन करता हूँ, और उस महाशक्ति (ह्रीं) से प्रार्थना करता हूँ कि वह मेरे सभी कार्यों को सिद्ध करे और भौतिक सुख प्रदान करे।

उत्पत्ति एवं शास्त्रीय संदर्भ

शक्ति विनायक मंत्र, भगवान गणेश के उस स्वरूप को समर्पित है जिसमें वे अपनी शक्ति (ऊर्जा/पत्नी) के साथ विराजमान हैं। यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्रों का एक संयोजन है और इसे तुरंत और अचूक फल देने में समर्थ माना जाता है। विशेष रूप से, यह मंत्र आर्थिक उन्नति के साथ-साथ धन, धान्य, पृथ्वी, भवन, कीर्ति, यश, सम्मान, और वाहन आदि सभी भौतिक सुखों में शीघ्र सफलता प्रदान करने वाला है।
इस मंत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
  • ऋषि: भार्गव
  • छंद: विराट्
  • देवता: शक्तिगणाधिप (शक्ति सहित गणेश)
  • बीज: श्रीं
  • शक्ति: ह्रीं
  • प्रयोजन: सभी अभीष्टों की सिद्धि (ममाभीष्टसिद्धये)

ध्यान श्लोक एवं अर्थ

विषाणां कुशावक्षसूत्रं च पाशं।
दधानं करैर्मोदकं पुष्करेण॥
स्वपत्न्यायुतं हेमभूषामराढ्यं।
गणेशं समुद्गादिनेशाममीडे॥
अर्थ: मैं उन भगवान गणेश का स्तवन करता हूं, जो अपने हाथों में टूटा दांत, कुश, अक्षसूत्र और पाश धारण करते हैं और अपनी सूंड में मोदक लिए हुए हैं। जो अपनी पत्नी (सिद्धि या बुद्धि) के साथ विराजमान हैं, स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित हैं और उगते हुए सूर्य के समान तेजस्वी हैं।

मंत्र का शब्दशः अर्थ

ॐ (Om): ब्रह्मांड की primordial ध्वनि, चेतना का प्रतीक।
ह्रीं (Hreem): यह 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' है। यह देवी भुवनेश्वरी का बीज मंत्र है और आकर्षण, सृजन और सांसारिक सुखों की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
ग्रीं (Greem): यह भगवान गणेश का एक शक्तिशाली बीज मंत्र है, जो 'गं' का ही एक रूप है। यह बाधाओं को नष्ट करने, ज्ञान और सिद्धि प्रदान करने पर केंद्रित है।
ह्रीं (Hreem): इस बीज मंत्र की पुनरावृत्ति शक्ति की ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे मंत्र का प्रभाव तीव्र और शीघ्र फलदायी होता है।
संपूर्ण अर्थ: मैं ब्रह्मांडीय चेतना (ॐ), महामाया शक्ति (ह्रीं), और विघ्नहर्ता गणेश (ग्रीं) की संयुक्त ऊर्जा का आवाहन करता हूँ, और उस महाशक्ति (ह्रीं) से प्रार्थना करता हूँ कि वह मेरे सभी कार्यों को सिद्ध करे और भौतिक सुख प्रदान करे।

मंत्र जाप के फल एवं लाभ

शीघ्र और अचूक फल

शास्त्रों के अनुसार, यह मंत्र तुरंत और निश्चित परिणाम देने में समर्थ है, विशेषकर भौतिक सुखों के लिए।

सर्व-भौतिक सुख

यह मंत्र आर्थिक उन्नति, धन, धान्य, भूमि, भवन, वाहन, कीर्ति और सम्मान सहित सभी प्रकार के भौतिक सुखों को आकर्षित करता है।

आकर्षण शक्ति में वृद्धि

'ह्रीं' बीज मंत्र के कारण साधक की आकर्षण शक्ति (करिश्मा) में वृद्धि होती है, जिससे सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में लाभ होता है।

बाधाओं का तत्काल निवारण

'ग्रीं' बीज मंत्र की शक्ति से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं और रुकावटें शीघ्र दूर होती हैं।

मंत्र सिद्धि की विशेष विधि

इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए एक विशेष अनुष्ठान का विधान है, जिसके लिए दृढ़ संकल्प और अनुशासन की आवश्यकता होती है।
  1. जप संख्या: इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए पांच लाख (5,00,000) बार जाप करना होता है।
  2. आहार नियम: साधना काल के दौरान, साधक को दिन में केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए (एकभुक्त)।
  3. व्यसन का त्याग: अनुष्ठान की अवधि में किसी भी प्रकार के व्यसन (नशा) या अन्य अनावश्यक पदार्थों का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित है।
  4. पवित्रता: साधना काल में मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना और ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।
जिन लोगों को शीघ्र भौतिक सुखों की कामना हो, उन्हें इस विधि से मंत्र को सिद्ध करना चाहिए।

सामान्य प्रश्न

"शक्ति विनायक" स्वरूप का क्या अर्थ है?

उत्तर: "शक्ति विनायक" भगवान गणेश का वह रूप है जिसमें वे अपनी शक्ति, यानी अपनी पत्नी (सिद्धि, बुद्धि या रिद्धि) के साथ होते हैं। यह रूप सृजन, समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक है, क्योंकि इसमें शिव (गणेश) और शक्ति दोनों की ऊर्जा समाहित होती है।

यह मंत्र इतना शीघ्र फलदायी क्यों है?

उत्तर: इसका कारण इसमें प्रयुक्त बीज मंत्र हैं। 'ह्रीं' और 'ग्रीं' अत्यंत शक्तिशाली और ऊर्जावान बीज मंत्र हैं। 'ह्रीं' सांसारिक इच्छाओं को आकर्षित करता है और 'ग्रीं' उन इच्छाओं की पूर्ति में आने वाली बाधाओं को हटाता है। इन दोनों का संयोजन शीघ्र परिणाम देता है।

क्या बिना सिद्धि अनुष्ठान के इस मंत्र का जाप कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। सिद्धि अनुष्ठान मंत्र की पूर्ण क्षमता को जाग्रत करने के लिए है। लेकिन दैनिक पूजा में इस मंत्र की एक या ग्यारह माला का जाप करने से भी जीवन में सकारात्मक बदलाव, आर्थिक सुधार और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।