॥ लक्ष्मी विनायक मन्त्र ॥
विनियोग:अस्य लक्ष्मी विनायक मंत्रस्य अन्तर्यामी ऋषिः, गायत्री छन्द, लक्ष्मीविनायको देवता, श्रीं बीजं, स्वाहा शक्तिः, ममाभीष्ट सिद्धार्थे जपे विनियोगः।
ध्यान:दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमब्धिपुत्र्या लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
मंत्र:ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये।
वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
विनियोग:अस्य लक्ष्मी विनायक मंत्रस्य अन्तर्यामी ऋषिः, गायत्री छन्द, लक्ष्मीविनायको देवता, श्रीं बीजं, स्वाहा शक्तिः, ममाभीष्ट सिद्धार्थे जपे विनियोगः।
ध्यान:दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमब्धिपुत्र्या लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
मंत्र:ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये।
वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
॥ अर्थ ॥
मैं देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त ऊर्जा का आवाहन करता हूँ। हे सौम्य गणपति, हे श्रेष्ठ वरदान देने वाले, आप सभी लोगों को मेरे अनुकूल करें और मेरी इच्छाओं को पूर्ण करें। मैं यह प्रार्थना आपको समर्पित करता हूँ।
मैं देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त ऊर्जा का आवाहन करता हूँ। हे सौम्य गणपति, हे श्रेष्ठ वरदान देने वाले, आप सभी लोगों को मेरे अनुकूल करें और मेरी इच्छाओं को पूर्ण करें। मैं यह प्रार्थना आपको समर्पित करता हूँ।
उत्पत्ति एवं शास्त्रीय संदर्भ
लक्ष्मी विनायक मंत्र, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, धन की देवी माँ लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का एक संयुक्त और अत्यंत विशेष फलदायक मंत्र है। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा अनिवार्य है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो, और लक्ष्मी जी की पूजा धन-समृद्धि के लिए की जाती है। यह मंत्र इन दोनों शक्तियों को एक साथ साधने का माध्यम है, जिससे धन-प्राप्ति के मार्ग में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
इस मंत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
- ऋषि: अन्तर्यामी
- छंद: गायत्री
- देवता: लक्ष्मीविनायक
- बीज: श्रीं
- शक्ति: स्वाहा
- प्रयोजन: अभीष्ट सिद्धि के लिए (ममाभीष्ट सिद्धार्थे)
ध्यान श्लोक एवं अर्थ
दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमब्धिपुत्र्या लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
धृताब्जयालिङ्गितमब्धिपुत्र्या लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
अर्थ: मैं उन स्वर्ण के समान आभा वाले लक्ष्मी गणेश का ध्यान करता हूँ, जो अपने हाथों में दांत, अभय मुद्रा, चक्र और वर धारण किये हुए हैं, जिनके अग्र हस्त में स्वर्ण का घट है, जो त्रिनेत्र धारी हैं, और जो कमल धारण करने वाली सागर-पुत्री (देवी लक्ष्मी) द्वारा आलिंगित हैं।
मंत्र का शब्दशः अर्थ
ॐ (Om): ब्रह्मांडीय ऊर्जा और चेतना का प्रतीक।
श्रीं (Shreem): देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र, जो धन, समृद्धि, प्रचुरता और ऐश्वर्य का आवाहन करता है।
गं (Gam): भगवान गणेश का बीज मंत्र, जो बाधाओं को दूर करने, बुद्धि और सफलता का प्रतीक है।
सौम्याय (Saumyaya): सौम्य या शांत स्वरूप वाले को। यह गणेश जी के शांत और वरदायक रूप का द्योतक है।
गणपतये (Ganapataye): गणों के स्वामी, गणेश जी को नमन।
वरवरद (Varavarada): वरदानों में भी श्रेष्ठ वरदान देने वाले।
सर्वजनं मे (Sarvajanam Me): सभी लोगों को मेरे।
वशमानय (Vashamanaya): वश में करें या मेरे अनुकूल करें।
स्वाहा (Swaha): अग्नि को समर्पित करने का मंत्र, जो आवाहन को पूर्ण करता है।
संपूर्ण अर्थ: मैं देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त ऊर्जा का आवाहन करता हूँ। हे सौम्य गणपति, हे श्रेष्ठ वरदान देने वाले, आप सभी लोगों को मेरे अनुकूल करें और मेरी इच्छाओं को पूर्ण करें। मैं यह प्रार्थना आपको समर्पित करता हूँ।
मंत्र जाप के फल एवं लाभ
धन-मार्ग की बाधाएं दूर
यह मंत्र धन प्राप्ति के रास्ते में आने वाली सभी ज्ञात और अज्ञात बाधाओं को दूर करता है।
असीम धन और समृद्धि
लक्ष्मी जी के 'श्रीं' बीज मंत्र के कारण यह साधक के जीवन में धन, वैभव और भौतिक समृद्धि को आकर्षित करता है।
सामाजिक और व्यावसायिक प्रभाव
'सर्वजनं मे वशमानय' अंश के कारण यह मंत्र साधक को एक magnétique व्यक्तित्व प्रदान करता है, जिससे लोग उससे प्रभावित होते हैं और उसके अनुकूल हो जाते हैं।
बुद्धि और निर्णय क्षमता
गणेश जी की कृपा से साधक की बुद्धि तीव्र होती है और वह सही वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम होता है।
मंत्र सिद्धि की विशेष विधि
यह एक तीव्र फलदायी मंत्र है और इसकी सिद्धि के लिए विशेष नियम बताए गए हैं:
- जप संख्या: इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए पांच लाख (5,00,000) बार जाप करना होता है।
- समय सीमा: यह अनुष्ठान ज्यादा से ज्यादा चौबीस (24) दिनों में पूरा हो जाना चाहिए। इसका अर्थ है प्रतिदिन लगभग 210 माला जाप करना।
- जाप का समय: इस मंत्र का जाप केवल रात्रि में ही करना चाहिए। रात्रि का समय लक्ष्मी जी की कृपा और तांत्रिक साधनाओं के लिए विशेष माना गया है।
- अनुशासन: साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना और केवल सात्विक आहार (Sattvic food) का सेवन करना अनिवार्य है।
सामान्य प्रश्न
'लक्ष्मी विनायक' स्वरूप का क्या महत्व है?
उत्तर: यह स्वरूप धन (लक्ष्मी) और बुद्धि/निर्विघ्नता (विनायक) का संगम है। इसका अर्थ है कि केवल धन ही नहीं, बल्कि उस धन को संभालने और बढ़ाने के लिए बुद्धि भी प्राप्त हो, और धन कमाने के मार्ग में कोई बाधा न आए।
इस मंत्र का जाप रात्रि में ही क्यों किया जाना चाहिए?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, रात्रि का समय, विशेषकर 'महानिशा' (मध्य रात्रि), देवी लक्ष्मी और अन्य शक्तियों के जागरण का समय होता है। इस समय वातावरण शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है, जिससे मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है।
क्या 24 दिन में 5 लाख जाप संभव है?
उत्तर: यह एक अत्यंत कठिन अनुष्ठान है जिसके लिए दृढ़ संकल्प और पूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। इसके लिए प्रतिदिन कई घंटों तक जाप करना पड़ता है। इसीलिए इसे शुरू करने से पहले साधक को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होना चाहिए।
