॥ राम मन्त्र ॥
विनियोग:अस्य राम मंत्रस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री रामो देवता, रां बीजम्, नमः शक्तिः, चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान:नीलांभोधरकांतिकांतमनिशं वीरासनाध्यासिनम्।
मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि।
सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम्।
पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥
मंत्र:रां रामाय नमः।
विनियोग:अस्य राम मंत्रस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री रामो देवता, रां बीजम्, नमः शक्तिः, चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान:नीलांभोधरकांतिकांतमनिशं वीरासनाध्यासिनम्।
मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि।
सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम्।
पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥
मंत्र:रां रामाय नमः।
॥ अर्थ ॥
यह मंत्र राम इष्ट रखने वाले साधकों के लिए तथा गृहस्थ व्यक्तियों के लिए उपयोगी माना गया है।
यह मंत्र राम इष्ट रखने वाले साधकों के लिए तथा गृहस्थ व्यक्तियों के लिए उपयोगी माना गया है।
परिचय एवं महत्व
यह मंत्र राम इष्ट रखने वाले साधकों के लिए तथा गृहस्थ व्यक्तियों के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है। भगवान राम का यह बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है और इसका जाप करने से साधक के जीवन में राम कृपा का वर्षा होता है।
इस मंत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
- ऋषि: ब्रह्मा
- छन्द: गायत्री
- देवता: श्री रामो
- बीजम्: रां
- शक्तिः: नमः
- प्रयोजन: चतुर्विध पुरुषार्थं सिद्धये (चारों पुरुषार्थों की सिद्धि के लिए)
ध्यान श्लोक एवं अर्थ
नीलांभोधरकांतिकांतमनिशं वीरासनाध्यासिनम्।
मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि।
सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम्।
पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥
मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि।
सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम्।
पश्यन्तं मुकुटाङ्गदादिविविधाकल्पोज्ज्वलाङ्गं भजे॥
अर्थ: मैं भगवान राम की आराधना करता हूँ, जिनकी कांति नीले बादल के समान सुंदर है और जो सदैव वीरासन में विराजमान हैं। जिनके एक हाथ में ज्ञानमुद्रा है और दूसरा हाथ (कमल के समान) घुटने पर रखा हुआ है। जिनके पार्श्व में माता सीता विद्युत के समान कांतिमान होकर कमल धारण किए हुए श्री राघव को देख रही हैं। जो मुकुट, बाजूबंद आदि विविध आभूषणों से सुसज्जित और प्रकाशित हैं।
मंत्र का शब्दशः अर्थ
रां (Rang): राम का बीज मंत्र।
रामाय (Ramaya): राम को।
नमः (Namah): नमस्कार है।
संपूर्ण अर्थ: मैं भगवान राम को नमस्कार करता हूँ। यह मंत्र राम के बीज "रां" से युक्त है जो इसे अत्यंत शक्तिशाली बनाता है।
मंत्र जाप के फल एवं लाभ
राम भक्ति में दृढ़ता
इस मंत्र के नियमित जाप से साधक की राम में भक्ति दृढ़ होती है और राम कृपा की प्राप्ति होती है।
चतुर्विध पुरुषार्थ की प्राप्ति
यह मंत्र धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - चारों पुरुषार्थों की सिद्धि में सहायक है।
गृहस्थों के लिए विशेष
यह मंत्र गृहस्थ जीवन जीने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी और कल्याणकारी है।
मानसिक शांति
इस मंत्र के जाप से मन में शांति और स्थिरता का संचार होता है।
मंत्र सिद्धि की विधि
इस मंत्र की सिद्धि के लिए शास्त्रों में निम्नलिखित विधान वर्णित है:
- जप संख्या: यह मंत्र छः लाख (6,00,000) बार जपने से सिद्ध होता है।
- नियमितता: प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में मंत्र का जाप करना चाहिए।
- पवित्रता: जाप के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता का पालन आवश्यक है।
