Logoपवित्र ग्रंथ

गायत्री मंत्र संपूर्ण ज्ञान, अर्थ, और जाप विधि

॥ Gayatri Mantra ॥

गायत्री मंत्र: संपूर्ण ज्ञान, अर्थ, और जाप विधि
॥ गायत्री मंत्र ॥

ॐ भूर्भुवः स्वः ।
तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि ।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
॥ अर्थ ॥

हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें।

कौन हैं देवी गायत्री - वेदों की माता

गायत्री मंत्र देवी गायत्री को समर्पित है, जिन्हें 'वेद माता' अर्थात वेदों की जननी कहा जाता है। वे परब्रह्म की शक्ति का साकार रूप हैं। उनके पांच मुख पंच प्राणों (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान) और पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रतीक हैं। देवी गायत्री ज्ञान, पवित्रता, सद्गुण और सत्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनका आवाहन करने से साधक की बुद्धि शुद्ध होती है और वह सत्य के मार्ग पर अग्रसर होता है।

मंत्र का शब्दशः विश्लेषण

ॐ: प्रणव, ब्रह्मांड की मूल ध्वनि
भूः: पृथ्वी लोक, प्राण स्वरूप
भुवः: अंतरिक्ष लोक, दुःख नाशक
स्वः: स्वर्ग लोक, सुख स्वरूप
तत्: वह, परमात्मा
सवितुः: सूर्य के समान तेजस्वी, प्रकाशक
वरेण्यं: पूजनीय, सर्वश्रेष्ठ
भर्गो: पापों का नाश करने वाला तेज
देवस्य: दिव्य, परमात्मा का
धीमहि: हम ध्यान करते हैं
धियो: बुद्धि को
यो नः: जो हमारी
प्रचोदयात्: सन्मार्ग में प्रेरित करें

मंत्र जाप के दिव्य लाभ

आत्मिक शुद्धि

नकारात्मकता और पाप कर्मों का नाश कर आत्मा को शुद्ध करता है।

ज्ञान और विवेक

बुद्धि को तीव्र कर सही और गलत में भेद करने की क्षमता प्रदान करता है।

मानसिक शांति

चिंता, भय और तनाव से मुक्ति दिलाकर मन को असीम शांति प्रदान करता है।

सकारात्मक ऊर्जा

जीवन में उत्साह, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

जाप की विधि और नियम

गायत्री मंत्र का जाप पूरी श्रद्धा और सही विधि से करने पर ही पूर्ण फल मिलता है।
  1. समय: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व), दोपहर और संध्याकाल (सूर्यास्त के समय) जाप के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।
  2. स्थान: एक शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थान चुनें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  3. आसन: ऊनी या कुश का आसन प्रयोग करें। पद्मासन या सुखासन में बैठें।
  4. माला: जाप के लिए तुलसी या रुद्राक्ष की 108 मनकों वाली माला का प्रयोग करें।
  5. उच्चारण: मंत्र का उच्चारण स्पष्ट, लयबद्ध और मध्यम स्वर में करें, न बहुत तेज न बहुत धीमे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या महिलाएं गायत्री मंत्र का जाप कर सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल। वेद और शास्त्र किसी भी लिंग, जाति या वर्ण के आधार पर भेद नहीं करते। कोई भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा से इस मंत्र का जाप कर सकता है।

108 बार जाप क्यों किया जाता है?

108 एक पवित्र अंक है जो ब्रह्मांड की पूर्णता का प्रतीक है। यह सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी, ज्योतिष के 12 राशियों और 9 ग्रहों के गुणनफल, और शरीर में स्थित चक्रों से जुड़ा है।

क्या जाप के लिए गुरु की आवश्यकता है?

यद्यपि गुरु से दीक्षा लेकर मंत्र जाप करना सर्वश्रेष्ठ है, परन्तु कोई भी व्यक्ति भगवान का स्मरण कर पूरी श्रद्धा से स्वयं भी जाप आरंभ कर सकता है।