ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तम्भ फाड़कर तुम प्रकटे, जनका दुख दूर करे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
हिरण्यकश्यप पापी, हरि भक्त सताये।
प्रहलाद जी को दुख दीने, खम्भे से बन्धाए॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
देवगण भी डरे, पापी प्रहलाद को धमकाये।
क्षणभंगुर कया में प्रभु, नरसिंह रूप में आये॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
अंगारों से भक्त जले, पापी प्रहलाद को दुख दीने।
नरसिंह रूप धरकर, हिरण्यकश्यप को मारे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
चक्र गदा त्रिशूल, कर में अस्त्र धारे।
नरसिंह जी की आरती, जो नर प्रेम से गाये॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।
प्रहलाद भक्त की रक्षा, कीनो मन से॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
प्रभु नरसिंह की आरती, जो नर प्रेम से गावे।
मनवांछित फल पावे, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
स्तम्भ फाड़कर तुम प्रकटे, जनका दुख दूर करे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
हिरण्यकश्यप पापी, हरि भक्त सताये।
प्रहलाद जी को दुख दीने, खम्भे से बन्धाए॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
देवगण भी डरे, पापी प्रहलाद को धमकाये।
क्षणभंगुर कया में प्रभु, नरसिंह रूप में आये॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
अंगारों से भक्त जले, पापी प्रहलाद को दुख दीने।
नरसिंह रूप धरकर, हिरण्यकश्यप को मारे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
चक्र गदा त्रिशूल, कर में अस्त्र धारे।
नरसिंह जी की आरती, जो नर प्रेम से गाये॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।
प्रहलाद भक्त की रक्षा, कीनो मन से॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
प्रभु नरसिंह की आरती, जो नर प्रेम से गावे।
मनवांछित फल पावे, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय नरसिंह हरे॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Om Jai Narsingh Hare, Prabhu Jai Narsingh Hare,
Stambh Phaad Kar Tum Prakate, Jan Ka Dukh Dur Kare. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Hiranyakashyap Paapi, Hari Bhakt Sataye,
Prahlad Ji Ko Dukh Deene, Khambhe Se Bandhaye. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Devgan Bhi Dare, Paapi Prahlad Ko Dhamkaye,
Kshanbhangur Kaya Mein Prabhu, Narsingh Roop Mein Aaye. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Angaron Se Bhakt Jale, Paapi Prahlad Ko Dukh Deene,
Narsingh Roop Dharkar, Hiranyakashyap Ko Mare. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Chakra Gada Trishul, Kar Mein Astra Dhare,
Narsingh Ji Ki Aarti, Jo Nar Prem Se Gaave. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Sukh Sampatti Ghar Aave, Kasht Mite Tan Ka,
Prahlad Bhakt Ki Raksha, Kino Man Se. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Prabhu Narsingh Ki Aarti, Jo Nar Prem Se Gaave,
Manvanchhit Phal Pave, Sukh Sampatti Pave. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
Stambh Phaad Kar Tum Prakate, Jan Ka Dukh Dur Kare. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Hiranyakashyap Paapi, Hari Bhakt Sataye,
Prahlad Ji Ko Dukh Deene, Khambhe Se Bandhaye. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Devgan Bhi Dare, Paapi Prahlad Ko Dhamkaye,
Kshanbhangur Kaya Mein Prabhu, Narsingh Roop Mein Aaye. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Angaron Se Bhakt Jale, Paapi Prahlad Ko Dukh Deene,
Narsingh Roop Dharkar, Hiranyakashyap Ko Mare. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Chakra Gada Trishul, Kar Mein Astra Dhare,
Narsingh Ji Ki Aarti, Jo Nar Prem Se Gaave. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Sukh Sampatti Ghar Aave, Kasht Mite Tan Ka,
Prahlad Bhakt Ki Raksha, Kino Man Se. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
Prabhu Narsingh Ki Aarti, Jo Nar Prem Se Gaave,
Manvanchhit Phal Pave, Sukh Sampatti Pave. ||
Om Jai Narsingh Hare. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
आरती का महत्त्व
"श्री नरसिंह भगवान की आरती" भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह की स्तुति है। यह आरती बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान के अद्भुत प्राकट्य का गुणगान करती है।
आरती के मुख्य भाव
- अद्भुत प्राकट्य (Divine Emergence): "स्तम्भ फाड़कर तुम प्रकटे" - भगवान ने न तो दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर, बल्कि खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया।
- भक्त रक्षा (Protection of Devotee): "प्रहलाद भक्त की रक्षा" - भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद को होलिका की अग्नि, विष और अन्य संकटों से बचाया।
- दुष्ट संहार (Destruction of Evil): "हिरण्यकश्यप को मारे" - भगवान ने अपने नखों से अत्याचारी हिरण्यकश्यप का अंत कर धर्म की स्थापना की।
गायन विधि और अवसर
- अवसर (Occasion): यह आरती नरसिंह जयंती, होलिका दहन और संकट के समय विशेष रूप से गाई जाती है।
- विधि (Method): भगवान नरसिंह को लाल पुष्प और नैवेद्य अर्पित कर, सायंकाल (गोधूलि बेला) में इस आरती का गान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
