जय देव जय देव जय साईनाथा। श्री सद्गुरुनाथा॥
विश्वंभरा विश्वेशा। तारक तू जगता॥
ब्रह्माण्डाचा नायक देवा तू कळले।
प्रत्यय निजभक्तांचे अद्भुत दावियेले॥
ब्रह्मा विष्णु शङ्कर गणपती तू त्राता।
भजतां तव पदकमला हरिसी भवचिंता॥१॥
हरूनि दारिद्र्याते रंका रक्षियले।
रोगग्रस्तां तुझिया उदिनें तारियले॥
वांझेसी तोषविलें देऊनिया पुत्रा।
जो जो वांछिल त्यांचा तू अससी दाता॥२॥
ज्ञानरवी तू दिधले ज्ञान अज्ञाना।
सन्मार्गा लावुनिया उद्धरिले त्यांना॥
ऐशी तू सकलांची ममताळू माता।
रोमांचित तनु होई गुण महिमा गातां॥३॥
यमपाशा तोडुनी तू भक्त सोडविले।
आयुर्बल देऊनि त्या सकला तोषविले॥
ऐसे सामर्थ्याचे प्रताप तव गातां।
शिणली मति मग आलों शरण तुला नाथा॥४॥
मद्वचनी विश्वासुनि जे सेवा करिती।
त्यांची चिंता लागे रात्रंदिन मजसी॥
ऐसे दृढ आश्वासन दिधलेसी जगता।
करुणेचा सागर तू अससी गुरुनाथा॥५॥
समतेची योगाची मूर्ती श्री साई।
ऋद्धिसिद्धी घेती लोळण तव पायीं॥
अंतर साक्षी तुजला सर्वांची वार्ता।
अगम्य तुजला कांहीं ऐसा तू ज्ञाता॥६॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
विश्वंभरा विश्वेशा। तारक तू जगता॥
ब्रह्माण्डाचा नायक देवा तू कळले।
प्रत्यय निजभक्तांचे अद्भुत दावियेले॥
ब्रह्मा विष्णु शङ्कर गणपती तू त्राता।
भजतां तव पदकमला हरिसी भवचिंता॥१॥
हरूनि दारिद्र्याते रंका रक्षियले।
रोगग्रस्तां तुझिया उदिनें तारियले॥
वांझेसी तोषविलें देऊनिया पुत्रा।
जो जो वांछिल त्यांचा तू अससी दाता॥२॥
ज्ञानरवी तू दिधले ज्ञान अज्ञाना।
सन्मार्गा लावुनिया उद्धरिले त्यांना॥
ऐशी तू सकलांची ममताळू माता।
रोमांचित तनु होई गुण महिमा गातां॥३॥
यमपाशा तोडुनी तू भक्त सोडविले।
आयुर्बल देऊनि त्या सकला तोषविले॥
ऐसे सामर्थ्याचे प्रताप तव गातां।
शिणली मति मग आलों शरण तुला नाथा॥४॥
मद्वचनी विश्वासुनि जे सेवा करिती।
त्यांची चिंता लागे रात्रंदिन मजसी॥
ऐसे दृढ आश्वासन दिधलेसी जगता।
करुणेचा सागर तू अससी गुरुनाथा॥५॥
समतेची योगाची मूर्ती श्री साई।
ऋद्धिसिद्धी घेती लोळण तव पायीं॥
अंतर साक्षी तुजला सर्वांची वार्ता।
अगम्य तुजला कांहीं ऐसा तू ज्ञाता॥६॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Jai Dev Jai Dev Jai Sainatha, Shri Sadgurunatha. ||
Vishvambhara Vishvesha, Tarak Tu Jagata. ||
Brahmandacha Nayak Deva Tu Kalale,
Pratyay Nijabhaktanche Adbhut Daviyele. ||
Brahma Vishnu Shankar Ganapati Tu Trata,
Bhajatan Tav Padakamala Harisi Bhavachinta. ||1||
Haruni Daridryate Ranka Rakshiyale,
Rogagrastan Tujhiya Udinen Tariyale. ||
Vanjhesi Toshavilen Deuniya Putra,
Jo Jo Vanchhil Tyancha Tu Asasi Data. ||2||
Jnanaravi Tu Didhale Jnan Ajnana,
Sanmarga Lavuniya Uddharile Tyanna. ||
Aishi Tu Sakalanchi Mamtalu Mata,
Romanchit Tanu Hoi Gun Mahima Gatan. ||3||
Yamapasha Toduni Tu Bhakt Sodavile,
Aayurbal Deuni Tya Sakala Toshavile. ||
Aise Samarthyache Pratap Tav Gatan,
Shinali Mati Mag Aalon Sharan Tula Natha. ||4||
Madvachani Vishvasuni Je Seva Kariti,
Tyanchi Chinta Lage Ratrandin Majasi. ||
Aise Drudh Aashvasan Didhalesi Jagata,
Karunecha Sagar Tu Asasi Gurunatha. ||5||
Samatechi Yogachi Murti Shri Sai,
Riddhisiddhi Gheti Lolan Tav Payin. ||
Antar Sakshi Tujala Sarvanchi Varta,
Agamya Tujala Kanhin Aisa Tu Jnata. ||6||
॥ Iti Sampurnam ॥
Vishvambhara Vishvesha, Tarak Tu Jagata. ||
Brahmandacha Nayak Deva Tu Kalale,
Pratyay Nijabhaktanche Adbhut Daviyele. ||
Brahma Vishnu Shankar Ganapati Tu Trata,
Bhajatan Tav Padakamala Harisi Bhavachinta. ||1||
Haruni Daridryate Ranka Rakshiyale,
Rogagrastan Tujhiya Udinen Tariyale. ||
Vanjhesi Toshavilen Deuniya Putra,
Jo Jo Vanchhil Tyancha Tu Asasi Data. ||2||
Jnanaravi Tu Didhale Jnan Ajnana,
Sanmarga Lavuniya Uddharile Tyanna. ||
Aishi Tu Sakalanchi Mamtalu Mata,
Romanchit Tanu Hoi Gun Mahima Gatan. ||3||
Yamapasha Toduni Tu Bhakt Sodavile,
Aayurbal Deuni Tya Sakala Toshavile. ||
Aise Samarthyache Pratap Tav Gatan,
Shinali Mati Mag Aalon Sharan Tula Natha. ||4||
Madvachani Vishvasuni Je Seva Kariti,
Tyanchi Chinta Lage Ratrandin Majasi. ||
Aise Drudh Aashvasan Didhalesi Jagata,
Karunecha Sagar Tu Asasi Gurunatha. ||5||
Samatechi Yogachi Murti Shri Sai,
Riddhisiddhi Gheti Lolan Tav Payin. ||
Antar Sakshi Tujala Sarvanchi Varta,
Agamya Tujala Kanhin Aisa Tu Jnata. ||6||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जय देव जय देव जय साईनाथा" आरती शिर्डी के साईं बाबा (Sai Baba) की महिमा का गुणगान करती है। इसमें साईं बाबा को सद्गुरुनाथ (Sadgurunatha) और विश्वंभर (Vishvambhara - विश्व का भरण-पोषण करने वाले) के रूप में पूजा गया है। यह आरती भक्त को साईं के सगुण परब्रह्म स्वरूप का अनुभव कराती है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
- दीन-दुखियों के रक्षक (Protector of the Poor): "हरूनि दारिद्र्याते रंका रक्षियले" - साईं बाबा दरिद्रता (Poverty) को दूर करके रंक (गरीब) की रक्षा करते हैं और भक्तों को संपन्न बनाते हैं।
- रोग और कष्ट निवारण (Curing Diseases): "रोगग्रस्तां तुझिया उदिनें तारियले" - बाबा की उदी (Sacred Ash) में अद्भुत शक्ति है, जो असाध्य रोगों को भी ठीक कर देती है और भक्तों को कष्टों से तार देती है।
- संतान प्राप्ति (Granting of Children): "वांझेसी तोषविलें देऊनिया पुत्रा" - साईं बाबा की कृपा से निःसंतान (Barren) महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है, जिससे उनका जीवन खुशियों से भर जाता है।
पौराणिक संदर्भ (Mythological Context)
आरती में साईं बाबा को ब्रह्मा, विष्णु, शंकर और गणपति का स्वरूप माना गया है ("ब्रह्मा विष्णु शङ्कर गणपती तू त्राता")। उन्हें कलयुग में दत्त दिगंबर (Datta Digambar) का अवतार माना जाता है जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
आरती/पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
- विशेष अवसर (Special Occasions): यह आरती विशेष रूप से गुरुवार (Thursday), रामनवमी, गुरु पूर्णिमा और विजयादशमी (पुण्यतिथि) के दिन गाई जाती है।
- विधि (Method): आरती करते समय साईं बाबा के चरणों ("पदकमला") में अपना मन लगाएं और पूर्ण श्रद्धा के साथ "जय साईनाथा" का जयघोष करें।
