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श्री सद्गुरुंची आरती

Shree Sadguru Aarti (Marathi) | Phalale Bhagya Majhe

श्री सद्गुरुंची आरती
फळलें भाग्य माझें धन्य झालों संसारी।
सद्गुरु भेटला हो तेणें धरियेलें करीं॥
पश्चिमे चालवीलें आत्मस्तुती निर्धारीं।
त्रिकुटावरी नांद देखियेला पंढरी॥१॥

तें सुख काय सांगूं वाचे बोलता न ये।
आरतिचेनि गुणें गेलें मीपण माये॥

राउळामाजीं जातां राहे देह अवस्था।
मन हैं उन्मन झालें नसे बद्धतेची वार्ता॥
हेतु हा मावळला शब्दा आली निःशब्दता।
तटस्थ होऊनि ठेलों नीजरूप पहातां॥२॥

आरती सद्गुरुचि उजळली अंतरीं।
प्रकाश थोर झाला सांठवेना अंबरी॥
रविशशि मावळले तया तेजामाझारीं।
वाजती दिव्य वाचें अनुहाते गजरी॥३॥

आनंदसागरांत प्रेमें दीधली बुडी।
लाधलें सौख्य मोठें न ये बोलीं॥
सद्गुरुचेनि संगें ऐसी आरती केली।
निवृत्तीनें आनंदाची तेथे वृत्ति निमाली॥४॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

इस आरती का विशिष्ट महत्व

"फळलें भाग्य माझें" आरती एक भक्त की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है, जिसे सद्गुरु (Sadguru) की कृपा प्राप्त हुई है। यह आरती दर्शाती है कि गुरु के मिलने से भक्त का भाग्य 'फलित' हो गया है और उसे संसार में धन्यता प्राप्त हुई है।

आरती के प्रमुख भाव और अर्थ

  • आत्मस्थिति (Self-Realization): "पश्चिमे चालवीलें आत्मस्तुती निर्धारीं" - गुरु ने भक्त को अंतर्मुखी होकर आत्मस्थिति (Self-Realization) की ओर अग्रसर किया है, जहाँ उसे अपने भीतर ही 'पंढरी' (ईश्वर का निवास) के दर्शन हुए हैं।
  • अहंकार का नाश (Dissolution of Ego): "आरतिचेनि गुणें गेलें मीपण माये" - आरती और भक्ति के प्रभाव से भक्त का 'मीपण' (अहंकार/Ego) नष्ट हो गया है।
  • दिव्य प्रकाश (Divine Light): "आरती सद्गुरुचि उजळली अंतरीं" - अंतःकरण में सद्गुरु की आरती का ऐसा प्रकाश हुआ है कि उसके सामने सूर्य और चंद्र का तेज भी फीका पड़ गया है।

पौराणिक संदर्भ (Mythological Context)

यह आरती उन्मनी अवस्था (Unmani Avastha) का वर्णन करती है, जहाँ मन विचारों से परे होकर पूर्ण शांति और आनंद में लीन हो जाता है ("मन हैं उन्मन झालें नसे बद्धतेची वार्ता")।

आरती/पाठ करने की विधि और विशेष अवसर

  • विशेष अवसर (Special Occasions): यह आरती गुरु पूजन, गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) और सत्संग के अंत में गाई जाती है।
  • विधि (Method): इसे गाते समय गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और कृतज्ञता का भाव रखें, जैसे कि आप साक्षात उनके चरणों में अपना सर्वस्व अर्पण कर रहे हों।
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