जय जय सच्चित्स्वरूप स्वामी गणराया।
अवतरलासी भूवर जड मूढ ताराया॥
निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी।
स्थिरचर व्यापुन उरले जे या जगतासी॥
तें तूं खरोखर निःसंशय अससी।
लीलामात्रें धरिलें मानव देहासी॥१॥
होऊं न देशी त्याची जाणिव तूं कवणा।
करुनी 'गणि गण गणात बोते' या भजना॥
धाता हरिहर गुरुवर तूंचि सुखसदना।
जिकडे पहावे तिकडे तूं दिससी नयना॥२॥
लीला अनंत केल्या बंकटसदनास।
पेटविले त्या अग्नीवांचुनि चिलमेस॥
क्षणांत आणिले जीवन निर्जल वापीस।
केला ब्रह्मगिरीच्या गर्वाचा नाश॥३॥
व्याधि वारुन केले कैकां संपन्न।
करविलें भक्तांलागी विठ्ठल दर्शन॥
भवसिंधु हा तरण्या नौका तव चरण।
स्वामी दासगणूचे मान्य करा कवन॥४॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
अवतरलासी भूवर जड मूढ ताराया॥
निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी।
स्थिरचर व्यापुन उरले जे या जगतासी॥
तें तूं खरोखर निःसंशय अससी।
लीलामात्रें धरिलें मानव देहासी॥१॥
होऊं न देशी त्याची जाणिव तूं कवणा।
करुनी 'गणि गण गणात बोते' या भजना॥
धाता हरिहर गुरुवर तूंचि सुखसदना।
जिकडे पहावे तिकडे तूं दिससी नयना॥२॥
लीला अनंत केल्या बंकटसदनास।
पेटविले त्या अग्नीवांचुनि चिलमेस॥
क्षणांत आणिले जीवन निर्जल वापीस।
केला ब्रह्मगिरीच्या गर्वाचा नाश॥३॥
व्याधि वारुन केले कैकां संपन्न।
करविलें भक्तांलागी विठ्ठल दर्शन॥
भवसिंधु हा तरण्या नौका तव चरण।
स्वामी दासगणूचे मान्य करा कवन॥४॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Jai Jai Satchitswaroop Swami Ganaraya,
Avataralasi Bhuvar Jad Moodh Taraya. ||
Nirgun Brahma Sanatan Avyay Avinashi,
Sthirachar Vyapun Urale Je Ya Jagatasi. ||
Ten Tun Kharokhar Nihsanshay Asasi,
Leelamatren Dharilen Manav Dehasi. ||1||
Houn Na Deshi Tyachi Janiv Tun Kavana,
Karuni 'Gani Gan Ganat Bote' Ya Bhajana. ||
Dhata Harihar Guruvar Tunchi Sukhsadana,
Jikade Pahave Tikade Tun Disasi Nayana. ||2||
Leela Anant Kelya Bankatsadanas,
Petavile Tya Agnivaanchuni Chilames. ||
Kshanat Aanile Jivan Nirjal Vaapis,
Kela Brahmagirichya Garvacha Naash. ||3||
Vyadhi Varun Kele Kaikan Sampanna,
Karavilen Bhaktanlagi Vitthal Darshan. ||
Bhavasindhu Ha Taranya Nauka Tav Charan,
Swami Dasaganuche Manya Kara Kavan. ||4||
॥ Iti Sampurnam ॥
Avataralasi Bhuvar Jad Moodh Taraya. ||
Nirgun Brahma Sanatan Avyay Avinashi,
Sthirachar Vyapun Urale Je Ya Jagatasi. ||
Ten Tun Kharokhar Nihsanshay Asasi,
Leelamatren Dharilen Manav Dehasi. ||1||
Houn Na Deshi Tyachi Janiv Tun Kavana,
Karuni 'Gani Gan Ganat Bote' Ya Bhajana. ||
Dhata Harihar Guruvar Tunchi Sukhsadana,
Jikade Pahave Tikade Tun Disasi Nayana. ||2||
Leela Anant Kelya Bankatsadanas,
Petavile Tya Agnivaanchuni Chilames. ||
Kshanat Aanile Jivan Nirjal Vaapis,
Kela Brahmagirichya Garvacha Naash. ||3||
Vyadhi Varun Kele Kaikan Sampanna,
Karavilen Bhaktanlagi Vitthal Darshan. ||
Bhavasindhu Ha Taranya Nauka Tav Charan,
Swami Dasaganuche Manya Kara Kavan. ||4||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जय जय सच्चित्स्वरूप स्वामी गणराया" यह आरती महाराष्ट्र के एक अत्यंत पूजनीय संत, श्री गजानन महाराज (Shri Gajanan Maharaj) को समर्पित है, जिनका मुख्य समाधि मंदिर शेगांव (Shegaon) में है। उन्हें भगवान गणेश या दत्तात्रेय का अवतार माना जाता है। इस आरती की रचना उनके एक प्रमुख भक्त, दासगणू महाराज (Dasganu Maharaj) ने की थी। यह आरती गजानन महाराज के परब्रह्म स्वरूप का वर्णन करती है और उनकी लीलाओं का स्मरण कराती है, जिससे भक्तों को उनकी कृपा और शक्ति का अनुभव होता है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती श्री गजानन महाराज के दिव्य स्वरूप और उनके चमत्कारों का गुणगान करती है:
- सच्चिदानंद स्वरूप (The Form of Satchidananda): "जय जय सच्चित्स्वरूप स्वामी गणराया।" आरती का आरंभ उन्हें 'सत्-चित्-आनंद' (सत्य, चेतना और आनंद) का स्वरूप बताकर किया गया है, जो परब्रह्म का लक्षण है।
- दिव्य लीलाएं और चमत्कार (Divine Plays and Miracles): "पेटविले त्या अग्नीवांचुनि चिलमेस।" (बिना अग्नि के चिलम जलाना) और "क्षणांत आणिले जीवन निर्जल वापीस।" (सूखे कुएं में क्षण भर में जल ले आना) - ये पंक्तियाँ उनके प्रसिद्ध चमत्कारों (miracles) का वर्णन करती हैं।
- सर्वव्यापी स्वरूप (Omnipresent Form): "जिकडे पहावे तिकडे तूं दिससी नयना।" अर्थात, 'जिधर भी देखता हूँ, उधर तुम ही आँखों को दिखाई देते हो'। यह उनके सर्वव्यापी होने के भाव को दर्शाता है।
- भवसागर से मुक्ति (Liberation from Worldly Ocean): "भवसिंधु हा तरण्या नौका तव चरण।" भक्त उनके चरणों को इस संसार रूपी सागर को पार करने के लिए एक नौका (boat) के समान मानता है, जो उसे मोक्ष तक ले जाएगी।
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- गजानन महाराज की पूजा के लिए गुरुवार (Thursday) का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि वे एक सद्गुरु हैं।
- यह आरती गजानन महाराज प्रकट दिन (Gajanan Maharaj Prakat Din) और अन्य उत्सवों पर विशेष रूप से गाई जाती है।
- महाराज की प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष घी का दीपक जलाएं। उन्हें भोग में बेसन के लड्डू या झुणका-भाकर (zunka bhakar) अर्पित करना बहुत प्रिय माना जाता है।
- इस आरती को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ गाने से भक्तों के संकट दूर होते हैं और उन्हें मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन (spiritual guidance) प्राप्त होता है।
