॥ ॐ जम्भला जलेन्द्राय स्वाहा मंत्र ॥
ॐ जम्भला जलेन्द्राय स्वाहा
ॐ जम्भला जलेन्द्राय स्वाहा
॥ अर्थ ॥
मैं जल और धन के स्वामी (जलेन्द्र) भगवान जम्भला को नमन करता हूँ और अपना समर्पण (स्वाहा) अर्पित करता हूँ।
मैं जल और धन के स्वामी (जलेन्द्र) भगवान जम्भला को नमन करता हूँ और अपना समर्पण (स्वाहा) अर्पित करता हूँ।
मंत्र का उद्गम एवं संदर्भ
ॐ जम्भला जलेन्द्राय स्वाहा मंत्र भगवान जम्भला, जिन्हें कुबेर के नाम से भी जाना जाता है, को समर्पित है। जम्भला को हिंदू धर्म में धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। यह मंत्र उनकी कृपा प्राप्त करने और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए जपा जाता है। इस मंत्र का उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों और जम्भला साधनाओं में मिलता है। यह मंत्र साधक को धन, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने की शक्ति रखता है।
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
ॐ: यह एक पवित्र ध्वनि है जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है।
जम्भला: यह भगवान कुबेर का एक नाम है, जो धन के देवता हैं।
जलेन्द्राय: 'जल' का अर्थ है जल और 'इन्द्राय' का अर्थ है इंद्र। यहाँ, यह भगवान जम्भला को जल के स्वामी के रूप में संबोधित करता है।
स्वाहा: यह एक आहुति शब्द है, जिसका अर्थ है 'अर्पण' या 'समर्पण'।
मंत्र के लाभ
धन और समृद्धि
यह मंत्र धन और समृद्धि को आकर्षित करने में मदद करता है।आर्थिक बाधाओं का निवारण
यह मंत्र आर्थिक बाधाओं और ऋणों को दूर करने में सहायक है।सौभाग्य
यह मंत्र सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।मानसिक शांति
यह मंत्र मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।जाप विधि
- चरण 1: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- चरण 2: एक शांत और पवित्र स्थान चुनें।
- चरण 3: भगवान जम्भला की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- चरण 4: धूप और दीप जलाएं।
- चरण 5: रुद्राक्ष या स्फटिक माला का उपयोग करके 108 बार मंत्र का जाप करें।
- चरण 6: जाप के बाद, भगवान जम्भला को अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह मंत्र किसके लिए है?
यह मंत्र उन लोगों के लिए है जो धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति करना चाहते हैं।
मंत्र का जाप कब करना चाहिए?
मंत्र का जाप सुबह या शाम को करना सबसे अच्छा होता है।
क्या मंत्र का जाप करते समय किसी विशेष नियम का पालन करना चाहिए?
मंत्र का जाप करते समय शांत और एकाग्र रहना चाहिए।
