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अष्टाक्षरी शिव मंत्र (ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं) अर्थ, लाभ और सिद्धि विधि

॥ Ashtakshari Shiva Mantra ॥

अष्टाक्षरी शिव मंत्र (ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं): अर्थ, लाभ और सिद्धि विधि
॥ अष्टाक्षरी शिव मन्त्र ॥

विनियोग:ॐ अस्य श्री शिवाष्टाक्षर मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः, पंक्तिश्छन्दः, उमापतिर्देवता सर्वार्थ सिद्धये विनियोगः।
ध्यान:बंधूकसन्निभं देवं त्रिनेत्रं चन्द्रशेखरम्।
त्रिशूलधारिणं वन्दे चारुहासं सुनिर्मलम्॥
कपालधारिणं देवं वरदाभय हस्तकम्।
उमया सहितं शंभुं ध्यायेत्सोमेश्वरं सदा॥
मंत्र:ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं।
॥ अर्थ ॥

मैं देवी की भौतिक और आकर्षक ऊर्जा (ह्रीं) के साथ सार्वभौमिक चेतना (ॐ नमः शिवाय) का आवाहन करता हूँ, और इस ऊर्जा को अपने भीतर ही स्थापित (ह्रीं) करता हूँ।

उत्पत्ति एवं महत्व

अष्टाक्षरी शिव मंत्र, शिव पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का एक शक्तिशाली, संपुटित (protected/energized) स्वरूप है। 'अष्टाक्षर' का अर्थ है 'आठ अक्षर'। यह मूल मंत्र के आदि और अंत में 'ह्रीं' बीज मंत्र को जोड़कर बनता है, जिससे इसकी शक्ति और प्रभाव में अत्यधिक वृद्धि होती है। यह मंत्र आर्थिक समृद्धि तथा जीवन में सभी दृष्टियों से उन्नति प्राप्त करने के लिए अत्यंत अनुकूल और सहायक है। 'ह्रीं' बीज के जुड़ने से यह मंत्र भौतिक और आध्यात्मिक, दोनों प्रकार की उन्नति प्रदान करने में सक्षम हो जाता है।
इस मंत्र के शास्त्रीय विधान (विनियोग) के अनुसार:
  • ऋषि: वामदेव
  • छंद: पंक्ति
  • देवता: उमापतिर्देवता
  • प्रयोजन: सर्वार्थ सिद्धये (सभी प्रयोजनों की सिद्धि के लिए)

ध्यान श्लोक एवं अर्थ

बंधूकसन्निभं देवं त्रिनेत्रं चन्द्रशेखरम्।
त्रिशूलधारिणं वन्दे चारुहासं सुनिर्मलम्॥
कपालधारिणं देवं वरदाभय हस्तकम्।
उमया सहितं शंभुं ध्यायेत्सोमेश्वरं सदा॥
अर्थ: मैं उन देव का वंदन करता हूँ जो बंधूक पुष्प के समान लाल हैं, जिनके तीन नेत्र हैं और जो मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं। मैं उन त्रिशूलधारी, सुंदर मुस्कान वाले और अत्यंत निर्मल देव की वंदना करता हूँ। मैं उन देव का ध्यान करता हूँ जो कपाल धारण करते हैं और जिनके हाथ वरद और अभय मुद्रा में हैं। मैं उमा के सहित उन शंभु सोमेश्वर का सदा ध्यान करता हूँ।

मंत्र का शब्दशः अर्थ

ह्रीं (Hreem): यह 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' है, जो देवी भुवनेश्वरी का प्रतीक है। यह आकर्षण, सृजन, भौतिक समृद्धि और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का आवाहन करता है।
ॐ नमः शिवाय: यह मूल पंचाक्षरी मंत्र है, जिसका अर्थ है 'मैं मंगलकारी शिव को नमन करता हूँ।' यह पंचतत्वों और सार्वभौमिक चेतना के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
ह्रीं (Hreem): मंत्र के अंत में 'ह्रीं' का पुनः प्रयोग ऊर्जा को बंद या 'लॉक' कर देता है, जिससे मंत्र की शक्ति साधक के भीतर ही केंद्रित रहती है और उसका क्षय नहीं होता।
संपूर्ण अर्थ: मैं देवी की भौतिक और आकर्षक ऊर्जा (ह्रीं) के साथ सार्वभौमिक चेतना (ॐ नमः शिवाय) का आवाहन करता हूँ, और इस ऊर्जा को अपने भीतर ही स्थापित (ह्रीं) करता हूँ।

मंत्र जाप के फल एवं लाभ

आर्थिक समृद्धि

'ह्रीं' बीज मंत्र के प्रभाव से यह मंत्र भौतिक संपदा और आर्थिक उन्नति के लिए अत्यंत सहायक है।

सौभाग्य और संपदा

यह मंत्र जीवन में सौभाग्य को आकर्षित करता है और सभी प्रकार की संपदा (ज्ञान, स्वास्थ्य, धन) प्रदान करता है।

सर्वतोमुखी उन्नति

साधक को जीवन के हर क्षेत्र - आध्यात्मिक, भौतिक, सामाजिक - में उन्नति प्राप्त होती है।

मोक्ष की प्राप्ति

भौतिक लाभों के साथ-साथ, यह मंत्र आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत कर अंततः मोक्ष प्राप्ति में भी सहायक होता है।

मंत्र सिद्धि की विधि

इस मंत्र को सिद्ध करने की एक विशिष्ट विधि है:
  1. जप संख्या: सबसे पहले इस मंत्र का एक लाख (1,00,000) बार जाप किया जाता है।
  2. दशांश यज्ञ: एक लाख जाप पूर्ण होने के बाद, मंत्र की संख्या का दसवां हिस्सा (दशांश), यानी दस हजार बार, मधु (शहद) और घृत (घी) की आहुतियां देकर यज्ञ किया जाता है।
  3. सिद्धि प्राप्ति: इस प्रकार विधि-विधान से यज्ञ संपन्न होने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है और साधक को इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।