श्री आञ्जनेय मङ्गळाष्टकम् (v2)

इस अष्टकम् का विशिष्ट महत्व
श्री आञ्जनेय मङ्गळाष्टकम् (Shri Anjaneya Mangalashtakam) भगवान हनुमान को समर्पित एक स्तुति है जो 'मंगल' अर्थात शुभता और कल्याण की कामना करती ਹੈ। 'मंगलाष्टकम्' आठ श्लोकों का एक ऐसा समूह होता है जिसका पाठ किसी भी शुभ कार्य के आरम्भ में, यात्रा पर जाने से पहले, या नित्य पूजा में देवी-देवताओं का आशीर्वाद और मंगल कामना के लिए किया जाता है। यह विशेष अष्टकम् (द्वितीय संस्करण) भगवान हनुमान के जन्म, उनके दिव्य कुल, स्वरूप और गुणों का संक्षिप्त और सारगर्भित वर्णन करता ਹੈ। प्रत्येक श्लोक का अंत "आञ्जनेयाय मङ्गलम्" से होता है, जिसका अर्थ है - "अंजनी पुत्र के लिए सब मंगलमय हो।"
अष्टकम् के प्रमुख भाव और लाभ
यह स्तोत्र भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा प्रकट करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सुंदर माध्यम है:
दिव्य जन्म का स्मरण (Remembrance of Divine Birth): स्तोत्र में उनके माता-पिता (अंजनी और केसरी), उनके पालक पिता (वायु देव), और उनके जन्म नक्षत्र (पूर्वाभाद्र) का उल्लेख है। उनके दिव्य जन्म का स्मरण करने से पाठक को भी दिव्यता का अंश प्राप्त होता है।
गुणों का स्तवन (Praise of Virtues): उन्हें 'करुणारसपूर्णाय' (करुणा रस से परिपूर्ण), 'भक्तरक्षणशील' (भक्तों की रक्षा करने वाले), और 'जानकीशोकहारिणे' (माता जानकी के शोक को हरने वाले) कहा गया ہے। इन गुणों का गान करने से भक्त में भी इन्हीं सद्गुणों का विकास होता है।
मंगल कामना (Auspicious Wishes): 'मंगलम्' शब्द का बार-बार उच्चारण एक सकारात्मक और शुभ वातावरण बनाता ਹੈ। इसका पाठ करने से दिन और कार्य की शुरुआत शुभ और मंगलकारी (auspicious and beneficial) होती है।
सर्व-रक्षक स्वरूप (As the Universal Protector): "सर्वलोकैकनाथाय" कहकर उन्हें सभी लोकों का एकमात्र नाथ और रक्षक माना गया ਹੈ। उनकी शरण लेने से सभी प्रकार के भय और संकटों से सुरक्षा (protection) मिलती है।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
किसी भी नए कार्य, यात्रा, या परीक्षा को शुरू करने से पहले इस मंगलाष्टकम् का पाठ करने से सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
इसका पाठ करने का सबसे शुभ दिन मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) है।
नित्य पूजा के आरम्भ में इसका पाठ करने से दिन भर सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) बनी रहती है और सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
हनुमान जयंती और राम नवमी जैसे उत्सवों पर इसका पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता ਹੈ।