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श्री आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम्

श्री आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम्

इस अष्टकम् का विशिष्ट महत्व

श्री आञ्जनेय मङ्गळाष्टकम् (Shri Anjaneya Mangalashtakam) भगवान हनुमान को समर्पित एक स्तुति है, जिसका पाठ मंगल और शुभता की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 'मंगल' का अर्थ है शुभ और 'अष्टकम्' का अर्थ है आठ श्लोकों का समूह। यह स्तोत्र भगवान हनुमान के पराक्रमी और भक्त-रक्षक स्वरूप का वर्णन करता है, जिसमें रामायण की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख है। प्रत्येक श्लोक का अंत "आञ्जनेयाय मङ्गलम्" के साथ होता है, जो अंजनी-पुत्र हनुमान के लिए मंगल की कामना करता है। यह स्तोत्र जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए एक शक्तिशाली प्रार्थना है।

अष्टकम् के प्रमुख भाव और लाभ (फलश्रुति)

यह स्तोत्र भगवान हनुमान की वीर गाथाओं का स्मरण करते हुए उनकी कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है:

  • सर्व कार्य सिद्धि (Success in All Endeavors): फलश्रुति में स्पष्ट रूप से कहा गया है, "सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि" - जो व्यक्ति इस अष्टकम् का नियमित पाठ करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

  • शत्रुओं का नाश (Destruction of Enemies): फलश्रुति का दूसरा भाग कहता है, "सर्वशत्रुविनाशनम्" - यह स्तोत्र सभी प्रकार के आंतरिक (जैसे काम, क्रोध) और बाहरी शत्रुओं का विनाश (destruction of enemies) करने में सक्षम है।

  • संकटों से मुक्ति (Relief from Troubles): "जानकीशोकनाशाय" और "लक्ष्मणप्राणदात्रे" जैसी पंक्तियाँ याद दिलाती हैं कि हनुमान जी ने माता सीता के शोक और लक्ष्मण जी के प्राण संकट को दूर किया था। इसी प्रकार, वे अपने भक्तों के भी सभी संकटों को हर लेते हैं।

  • राम-भक्ति की प्राप्ति (Attainment of Devotion to Rama): "श्रीरामपादभक्ताय" कहकर उनकी श्री राम के चरणों में अटूट भक्ति की प्रशंसा की गई है। इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक के मन में भी राम-भक्ति (devotion to Lord Rama) का भाव जाग्रत होता है।

पाठ करने की विधि और विशेष अवसर

  • किसी भी शुभ कार्य, जैसे नई नौकरी, व्यापार, या यात्रा शुरू करने से पहले इस मंगलाष्टकम् का पाठ करना सफलता सुनिश्चित करता है।

  • इसका पाठ करने का सबसे शुभ दिन मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) है।

  • नियमित रूप से प्रातःकाल पूजा के समय इसका पाठ करने से दिन भर सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) और सुरक्षा का अनुभव होता है।

  • हनुमान जयंती के अवसर पर इस स्तोत्र का पाठ करना भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय है।