जयदेव जयदेव श्री व्याडेश्वरा।
प्रणिपात साष्टांग तुज गंगाधरा॥
भार्गवनिर्मित पावन अपरांत भूमी।
त्यामाजी अवतरला जगताचा स्वामी॥
व्याडी स्थापित लिंगे गुप्तचि राहिला।
शरणागत जे भाविक तारित त्यां सकळा॥१॥
अंबामाता आणिक शोभे गणपती।
गरुडासह मारूती नंदी तो पुढती॥
श्रीपती लक्ष्मी सूर्य भवती बैसले।
पंचायतन रूपे मंदिर शोभले॥२॥
सात्विक तो गाभारा पिंडी तव त्यात।
सप्त वदनी फणिधर धरतो वरि छत्र॥
संतत धार धराया अभिषेक पात्र।
ध्यानचि सुंदर दिसले गिरीशा सुपात्र॥३॥
ॐ श्रीव्याडेश्वराय नमः।
॥ इति संपूर्णंम् ॥
प्रणिपात साष्टांग तुज गंगाधरा॥
भार्गवनिर्मित पावन अपरांत भूमी।
त्यामाजी अवतरला जगताचा स्वामी॥
व्याडी स्थापित लिंगे गुप्तचि राहिला।
शरणागत जे भाविक तारित त्यां सकळा॥१॥
अंबामाता आणिक शोभे गणपती।
गरुडासह मारूती नंदी तो पुढती॥
श्रीपती लक्ष्मी सूर्य भवती बैसले।
पंचायतन रूपे मंदिर शोभले॥२॥
सात्विक तो गाभारा पिंडी तव त्यात।
सप्त वदनी फणिधर धरतो वरि छत्र॥
संतत धार धराया अभिषेक पात्र।
ध्यानचि सुंदर दिसले गिरीशा सुपात्र॥३॥
ॐ श्रीव्याडेश्वराय नमः।
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Jaidev Jaidev Shri Vyadeshvara,
Pranipat Sashtang Tuj Gangadhara. ||
Bhargavanirmit Paavan Aparant Bhumi,
Tyamaji Avtarala Jagatacha Swami. ||
Vyadi Sthapit Linge Guptachi Rahila,
Sharanagat Je Bhavik Tarit Tyan Sakala. ||1||
Ambamaata Aanik Shobhe Ganapati,
Garudasah Maruti Nandi To Pudhati. ||
Shripati Lakshmi Surya Bhavati Baisale,
Panchayatan Rupe Mandir Shobhale. ||2||
Satvik To Gabhara Pindi Tav Tyat,
Sapta Vadani Phanidhar Dharato Vari Chhatra. ||
Santat Dhar Dharaya Abhishek Patra,
Dhyanachi Sundar Disale Girisha Supatra. ||3||
Om Shri Vyadeshwaraya Namah.
॥ Iti Sampurnam ॥
Pranipat Sashtang Tuj Gangadhara. ||
Bhargavanirmit Paavan Aparant Bhumi,
Tyamaji Avtarala Jagatacha Swami. ||
Vyadi Sthapit Linge Guptachi Rahila,
Sharanagat Je Bhavik Tarit Tyan Sakala. ||1||
Ambamaata Aanik Shobhe Ganapati,
Garudasah Maruti Nandi To Pudhati. ||
Shripati Lakshmi Surya Bhavati Baisale,
Panchayatan Rupe Mandir Shobhale. ||2||
Satvik To Gabhara Pindi Tav Tyat,
Sapta Vadani Phanidhar Dharato Vari Chhatra. ||
Santat Dhar Dharaya Abhishek Patra,
Dhyanachi Sundar Disale Girisha Supatra. ||3||
Om Shri Vyadeshwaraya Namah.
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जयदेव जयदेव श्री व्याडेश्वरा" यह आरती कोंकण (Konkan) क्षेत्र के गुहागर (Guhagar) में स्थित अत्यंत प्राचीन और जागृत शिव मंदिर, श्री व्याडेश्वर (Shri Vyadeshwar) को समर्पित है। यह मंदिर अनेक चित्पावन ब्राह्मण परिवारों का कुलदैवत (Kuldaivat) है। आरती में इस स्थान की महिमा का वर्णन करते हुए इसे भार्गवनिर्मित (Bhargavanirmit) कहा गया है, अर्थात इसकी स्थापना भगवान परशुराम (Bhargava) द्वारा रचित पवित्र 'अपरांत भूमि' (कोंकण) में हुई है। यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती भगवान व्याडेश्वर के दिव्य स्वरूप और मंदिर की वास्तुकला का सुंदर चित्रण करती है:
- परशुराम क्षेत्र (Land of Parashurama): "भार्गवनिर्मित पावन अपरांत भूमी" - यह भूमि भगवान परशुराम द्वारा समुद्र को पीछे धकेल कर बनाई गई पवित्र भूमि है, जहाँ स्वयं जगत के स्वामी (शिव) अवतरित हुए.
- व्याडि द्वारा स्थापना (Established by Vyadi): "व्याडी स्थापित लिंगे गुप्तचि राहिला" - पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि व्याडि (या व्याड) ने इस लिंग की स्थापना की थी, जो कुछ समय तक गुप्त रहा और बाद में भक्तों के कल्याण के लिए प्रकट हुआ.
- पंचायतन स्वरूप (Panchayatan Form): "पंचायतन रूपे मंदिर शोभले" - यह एक पंचायतन मंदिर है, जहाँ भगवान शिव (व्याडेश्वर) केंद्र में हैं और उनके चारों ओर सूर्य (Surya), गणेश (Ganapati), अंबा माता (Devi/Ambamaata) और श्रीपति (Vishnu) विराजमान हैं.
- गर्भगृह का वर्णन (Sanctum Description): "सप्त वदनी फणिधर धरतो वरि छत्र" - गर्भगृह में शिवलिंग के ऊपर सात फनों वाला शेषनाग (Sheshnag) छत्र छाया किए हुए है और निरंतर जलाभिषेक (Abhishek) होता रहता है.
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- नित्य पूजा (Daily Worship): गुहागर और आसपास के भक्त प्रतिदिन, विशेषकर सोमवार (Monday) और प्रदोष के दिन इस आरती का गायन करते हैं।
- महाशिवरात्रि (Mahashivratri): महाशिवरात्रि और श्रावण मास (Shravan Month) में इस मंदिर में भव्य उत्सव होता है, जहाँ यह आरती सामूहिक रूप से गाई जाती है।
- अभिषेक (Abhisheka): आरती से पूर्व भगवान व्याडेश्वर को बेल पत्र (Bel Patra) और जल/दूध से अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है ("संतत धार धराया अभिषेक पात्र").
