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श्रीबालानीराजनम्

Shri Bala Nirajanam | Jai Bale Tripure

श्रीबालानीराजनम्
जय बाले त्रिपुरे जय बाले जय त्रिपुरे।
द्वेधा विधृतशरीरे शिवशक्त्याकारे॥१॥

अरुणकिरणनिभासे बहुकृतविश्वासे।
मौक्तिकशोभितनासे कमलमुकुलवासे॥२॥

निजशक्तिस्वविलासे दनुजकृतत्रासे।
शशिवदनाधरहासे भक्तार्पितरासे॥३॥

इन्दुविराजितभाले करधृतजपमाले।
भक्तं रक्षसि बाले करपुस्तकजाले॥४॥

इतराभयशीले नाशितभवजाले।
रत्नविभूषितमाले खलजनकृतकाले॥५॥

मुकुलाभस्तनभारे कण्ठार्पितहारे।
तारितभवाब्धिपारे श्रितमूलाधारे॥६॥

कर्णीरथकृतचारे जयसि निराकारे।
कामेश्यङ्काधारे भक्तहृदयसञ्चारे॥७॥

आदौ वाग्भवबीजे मध्ये क्लीम्बीजे।
अन्ते सुशक्तिबीजे क्रीडसि हृदि निर्बीजे॥८॥

मञ्जीरध्वनिमण्डितमृदुतरशुभचरणे।
रमतां मम चित्तमिदं तव पूजनकरणे॥९॥

तव नीराजनकरणं भवसागरतरणम्।
बाले भव मम शरणम्। बाले भव शरणम्॥१०॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

आरती का महत्त्व

"श्रीबालानीराजनम्" देवी बाला त्रिपुरसुंदरी की एक सुंदर संस्कृत आरती है। बाला त्रिपुरसुंदरी, ललिता महात्रिपुरसुंदरी का बाल रूप हैं। यह आरती उनकी सुंदरता, शक्ति और करुणा का वर्णन करती है और भक्तों को भय से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करती है।

आरती के मुख्य भाव

  • शिव-शक्ति आकार (Form of Shiva-Shakti): "शिवशक्त्याकारे" - देवी बाला शिव और शक्ति का सम्मिलित स्वरूप हैं।
  • अरुण किरण (Radiance of Rising Sun): "अरुणकिरणनिभासे" - उनकी कांति उगते हुए सूर्य की किरणों के समान लाल और तेजस्वी है।
  • भवसागर तारिणी (Liberator): "तारितभवाब्धिपारे" - वे भक्तों को संसार रूपी सागर से पार उतारने वाली हैं।

गायन विधि और अवसर

  • अवसर (Occasion): यह आरती नवरात्रि, शुक्रवार, और देवी की नित्य पूजा के समय गाई जाती है।
  • विधि (Method): देवी बाला के चित्र या यंत्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर, पुष्प अर्पित करते हुए इस नीराजनम् (आरती) का पाठ करें।
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