श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥
करुणामयी सकल अघ हारिणी।
अमृत वर्षिणी नमो नमः॥
जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥
अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।
खल-दल नाशिनी नमो नमः॥
भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।
करुणा कलिते नमो नम:॥
जय शरणं वरणं नमो नमः।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
राजेश्वरी जय नमो नमः॥
करुणामयी सकल अघ हारिणी।
अमृत वर्षिणी नमो नमः॥
जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥
अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।
खल-दल नाशिनी नमो नमः॥
भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।
करुणा कलिते नमो नम:॥
जय शरणं वरणं नमो नमः।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Shree Mateshwari Jai Tripureshwari.
Rajeswari Jai Namo Namah. ||
Karunamayi Sakal Agh Harini.
Amrit Varshini Namo Namah. ||
Jai Sharanam Varanam Namo Namah.
Shree Mateshwari Jai Tripureshwari. ||
Ashubh Vinashini, Sab Sukh Dayini.
Khal-Dal Nashini Namo Namah. ||
Bhandasur Vadkarini Jai Maa.
Karuna Kalite Namo Namah. ||
Jai Sharanam Varanam Namo Namah.
Jai Tripur Sundari Namo Namah. ||
Shree Mateshwari Jai Tripureshwari.
Rajeswari Jai Namo Namah. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
Rajeswari Jai Namo Namah. ||
Karunamayi Sakal Agh Harini.
Amrit Varshini Namo Namah. ||
Jai Sharanam Varanam Namo Namah.
Shree Mateshwari Jai Tripureshwari. ||
Ashubh Vinashini, Sab Sukh Dayini.
Khal-Dal Nashini Namo Namah. ||
Bhandasur Vadkarini Jai Maa.
Karuna Kalite Namo Namah. ||
Jai Sharanam Varanam Namo Namah.
Jai Tripur Sundari Namo Namah. ||
Shree Mateshwari Jai Tripureshwari.
Rajeswari Jai Namo Namah. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
आरती का महत्व
"श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी" माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी की प्रमुख आरती है। माँ ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं और उन्हें राजराजेश्वरी (Rajarajeshwari) के नाम से भी जाना जाता है। इस आरती का पाठ करने से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
आरती के मुख्य भाव
- त्रिपुरेश्वरी (Ruler of Three Worlds): "जय त्रिपुरेश्वरी" - माँ ललिता तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) की स्वामिनी हैं।
- भंडासुर वधकारिणी (Slayer of Bhandasura): "भण्डासुर वधकारिणी जय माँ" - माँ ने भंडासुर नामक असुर का वध करके देवताओं और ऋषियों की रक्षा की थी। यह उनकी शक्ति और वीरता का प्रतीक है।
- करुणामयी (Compassionate Mother): "करुणामयी सकल अघ हारिणी" - माँ अत्यंत दयालु हैं और अपने भक्तों के सभी पापों और कष्टों का हरण करती हैं।
गायन की विधि और अवसर
- अवसर (Occasion): यह आरती मुख्य रूप से नवरात्रि, शुक्रवार और श्री विद्या (Shri Vidya) पूजा के समय गाई जाती है।
- विधि (Method): श्री चक्र (Shri Chakra) या माँ की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर, पूर्ण भक्ति भाव से इस आरती का गायन करें।
