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श्री अमरनाथार्तिक्यम्

Shri Amaranatha Artikyam | Jai Jai Jai Shivashankara

श्री अमरनाथार्तिक्यम्
जय जय जय शिवशङ्कर करुणाघन ईश
काश्मीरगिरिविहारिन् जयजय अमरेश॥१॥

ॐ हर हर हर महादेव॥ (ध्रु.)

उद्यत्सूर्यसमप्रभ दुग्धार्णव धवल।
प्रालेयाप्लुतमूर्ते स्मरभञ्जनशील॥२॥

जगदुत्पत्तिः सर्वा तव शम्भो लास्यम्।
अवनेरवनं सुरनरसहितं तव हास्यम्॥३॥

या ते रुद्र शिवातनुरमृता हिमवेशे।
अभिचाकशीहि भगवन् तयैव हृद्देशे॥४॥

हिमगिरिगह्वरवासं कृतकल्मषनाशम्।
भक्तजनप्रियमीशं नमामि अविनाशम्॥५॥

यो भक्त्याऽर्चयति त्वां अनन्यभावेन।
कल्पतरुश्चिन्तामणिराप्तः खलु तेन॥६॥

घनदसखं रत्नोज्वल-रूपं शशिशुभ्रम्।
स्वयम्भुवं तं वन्दे शिरसाऽहमदभ्रम्॥७॥

आर्तिक्यं तेऽस्तु मुदा प्रसीद परमात्मन्।
विघ्नान् नाशय पूरय कामान् सर्वात्मन्॥८॥
॥ इति स्वामी वरदानन्दभारतीविरचितं श्रीअमरनाथार्तिक्यम् सम्पूर्णम् ॥

आरती का महत्त्व

"श्री अमरनाथार्तिक्यम्" भगवान शिव के अमरनाथ स्वरूप की स्तुति है। यह आरती कश्मीर के हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में विराजमान स्वयंभू हिमलिंग की महिमा का गान करती है। यह भक्तों को शिव की कृपा और अमरत्व का आशीर्वाद प्रदान करती है।

आरती के मुख्य भाव

  • काश्मीर-गिरि-विहारिन् (Dweller of Kashmir): "काश्मीरगिरिविहारिन् जयजय अमरेश" - भगवान शिव कश्मीर की पर्वत श्रृंखलाओं में विहार करने वाले अमरेश (अमरनाथ) हैं।
  • प्रालेयाप्लुतमूर्ते (Form Covered in Ice): "प्रालेयाप्लुतमूर्ते स्मरभञ्जनशील" - उनका स्वरूप बर्फ से ढका हुआ है और वे कामदेव का नाश करने वाले हैं।
  • स्वयंभू (Self-Manifested): "स्वयम्भुवं तं वन्दे" - मैं उस स्वयंभू (अपने आप प्रकट होने वाले) शिव की वंदना करता हूँ।

गायन विधि और अवसर

  • अवसर (Occasion): यह आरती विशेष रूप से अमरनाथ यात्रा, श्रावण मास, और सोमवार को गाई जाती है।
  • विधि (Method): भगवान शिव के हिमलिंग या पार्थिव लिंग के समक्ष धूप, दीप और बेलपत्र अर्पित कर इस संस्कृत आरती का सस्वर पाठ करें।
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