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श्रीपादवल्लभाची आरती

Shree Padavallabha Aarti (Marathi) | Digambara Digambara

श्रीपादवल्लभाची आरती
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपादवल्लभ दिगंबरा।
आरती हे तव चरणी राहो, नति तति गुरुवरा॥

दिग्भिरवेष्टितमंबरमेव प्रत्यग्ब्रह्मेति।
खं ब्रह्मेति श्रुतिरपि वदति, दिगंबराचेति॥१॥

दिगवत् चांबरमेव व्यापक पूर्णब्रह्मेति।
सच्चित्सुखघनमायातीत, दिगंबरा वदति॥२॥

श्रीपादवल्लभ नाम प्राप हि नक्रगजेन्द्रमिव।
द्रोपद्यंबरीषचोर, ग्रसितद्विजमेव॥३॥

दिगंबरा गुरु वासुदेव दत्तस्त्वं ब्रह्म।
कामक्रोधग्रसितं मां लभ, तथैव झटिति वह॥४॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

इस आरती का विशिष्ट महत्व

"दिगंबरा दिगंबरा श्रीपादवल्लभ दिगंबरा" यह आरती भगवान दत्तात्रेय के कलयुग में पहले पूर्णावतार (Complete Incarnation) श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी को समर्पित है। इनका जन्म आंध्र प्रदेश के पिठापुरम (Pithapuram) में हुआ, जिसे उनकी 'जन्मभूमि' माना जाता है, और उन्होंने कुरवपुर (Kuravpur) में अपनी लीलाएं रचीं, जो उनकी 'कर्मभूमि' और 'तपोभूमि' है। यह आरती केवल एक गीत नहीं, बल्कि दत्त संप्रदाय (Datta Sampradaya) का एक महामंत्र है जो भक्तों को गुरु की कृपा से जोड़ता है। इसे गाने से वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।

आरती के प्रमुख भाव और अर्थ

  • दिगंबरा का अर्थ (Meaning of Digambara): 'दिगंबरा' शब्द का अर्थ है 'दिशाएं ही जिनका वस्त्र हैं', जो ईश्वर की सर्वव्यापकता (Omnipresence) और सीमाओं से परे होने का प्रतीक है। यह भगवान के निराकार और निर्गुण स्वरूप को दर्शाता है।
  • पितृ दोष निवारण (Removal of Ancestral Curses): श्रीपाद वल्लभ के नामस्मरण और इस आरती के गायन से पितृ दोष (Pitru Dosha) के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है।
  • भय और चिंता से मुक्ति (Freedom from Fear and Anxiety): यह आरती भक्तों के मन से अज्ञात भय को दूर करती है और उन्हें मानसिक शांति (Mental Peace) और स्थिरता प्रदान करती है।
  • इच्छा पूर्ति (Fulfillment of Desires): सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भौतिक और आध्यात्मिक (Material and Spiritual) दोनों प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पौराणिक संदर्भ (Mythological Context)

श्री गुरु चरित्र (Shree Guru Charitra) में श्रीपाद श्रीवल्लभ की महिमा का विस्तार से वर्णन है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, उन्होंने वल्लभेश ब्राह्मण (Vallabhesh Brahmin) को चोरों से बचाया और उसे नया जीवनदान दिया। यह घटना सिद्ध करती है कि जो भक्त अनन्य भाव से उनका स्मरण करता है, उसकी रक्षा स्वयं श्रीपाद प्रभु करते हैं।

आरती/पाठ करने की विधि और विशेष अवसर

  • विशेष अवसर (Special Occasions): यह आरती विशेष रूप से गुरुवार (Thursday) और दत्त जयंती (Datta Jayanti) के पावन पर्व पर गाई जाती है।
  • विधि (Method): स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। दत्तात्रेय या श्रीपाद वल्लभ की मूर्ति/चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। 'श्रीपाद श्रीवल्लभ चरितामृत' के पाठ के बाद इस आरती का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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