वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी॥
करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।
पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकांता॥
कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।
सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥
जय देवी जय देवी...॥
मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।
झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी॥
माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।
शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥
जय देवी जय देवी...॥
तारा शक्ति अगम्या शिवभक्तां सुलभ।
भवतारक तू जननी आम्हांवरि लोभ॥
त्राहि त्राहि शरणागत আর্মवपालक शुभे।
दासासाठीं विलंबे काय जी महा-अंबे॥
जय देवी जय देवी...॥
ब्रह्मादिक सुरवर देती आरती।
तुजलागीं मृडानी भवानी हैमवती॥
अघटित तव महिमा काय वर्णू मी मति।
त्रुटि घ्याव्या करुणा दे मजला निश्चिती॥
जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Vassasi Vyapkarupe Tu Sthulsukshmi. ||
Jai Devi Jai Devi Jai Mahalakshmi. ||
Karveerpurvasini Surwarmunimata,
Purharwardayini Murharprijkanta. ||
Kamlakare Jathari Janmavila Dhata,
Sahastravadani Bhudhar Na Pure Gun Gata. ||
Jai Devi Jai Devi... ||
Matuling Gada Khetak Ravikirani,
Jhalke Hatakwati Piyushraspani. ||
Manikrasana Surangwasana Mrugnayani,
Shashikarvadana Rajas Madanachi Janani. ||
Jai Devi Jai Devi... ||
Tara Shakti Agamya Shivbhaktan Sulabh,
Bhavatarak Tu Janani Aamhanvari Lobh. ||
Trahi Trahi Sharanagat Aarmavpalak Shubhe,
Dasasathin Vilambe Kay Ji Maha-Ambe. ||
Jai Devi Jai Devi... ||
Brahmadik Survar Deti Aarti,
Tujlagi Mrudani Bhavani Haimavati. ||
Aghatit Tav Mahima Kay Varnu Mi Mati,
Truti Ghyavya Karuna De Majla Nishchiti. ||
Jai Devi Jai Devi Jai Mahalakshmi. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी" आरती विशेष रूप से कोल्हापुर, महाराष्ट्र में स्थित महालक्ष्मी को समर्पित है, जिन्हें 'करवीरपुरवासिनी' (करवीर/कोल्हापुर में निवास करने वाली) के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ देवी सती का त्रिनेत्र गिरा था। यह आरती देवी के सार्वभौमिक, सूक्ष्म और स्थूल रूपों की वंदना करती है। यह उन्हें न केवल धन और समृद्धि की देवी के रूप में, बल्कि देवताओं और ऋषियों की माता, भगवान शिव को वरदान देने वाली और भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी के रूप में भी पूजती है। इस आरती का पाठ भक्तों को भौतिक सुख (material prosperity) और आध्यात्मिक मुक्ति (spiritual liberation) दोनों प्रदान करता है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती माँ महालक्ष्मी के भव्य और शक्तिशाली स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन करती है:
- करवीरपुरवासिनी (Resident of Karveer/Kolhapur): "करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता" - यह पंक्ति सीधे तौर पर कोल्हापुर की महालक्ष्मी को संबोधित करती है, जो देवताओं और ऋषियों की भी माता हैं। यह उनके स्थान की पवित्रता और उनके सर्वोच्च मातृ स्वरूप को उजागर करता है।
- शिव और विष्णु की पूज्या (Worshipped by Shiva and Vishnu): "पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकांता" - वे 'पुरहर' (भगवान शिव) को वरदान देती हैं और 'मुरहर' (भगवान विष्णु) की प्रिय पत्नी हैं। यह दर्शाता है कि उनकी शक्ति त्रिदेवों द्वारा भी सम्मानित है, जो उनके परम महत्व को स्थापित करता है।
- दिव्य शस्त्र धारिणी (Holder of Divine Weapons): "मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं" - आरती में उनके द्वारा धारण किए गए शस्त्रों का वर्णन है: मातुलिंग (एक प्रकार का फल, जो सृजन का प्रतीक है), गदा, खेटक (ढाल) और एक पात्र जो अमृत से भरा है। यह उनके सृजन, पालन और संहार (protection from evil) की शक्तियों को दर्शाता है।
- भवतारिणी माता (The Mother Who Liberates): "भवतारक तू जननी आम्हांवरि लोभ" - भक्त देवी से प्रार्थना करता है कि 'आप भवसागर से तारने वाली माता हैं, हम पर अपनी कृपा बनाए रखें।' यह उनके करुणामय रूप को दर्शाता है जो भक्तों को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाता है और मोक्ष (salvation) का मार्ग प्रशस्त करता है।
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- यह आरती करने का सबसे शुभ दिन शुक्रवार (Friday) माना जाता है, जो देवी लक्ष्मी को समर्पित है।
- दिवाली (विशेषकर लक्ष्मी पूजन), नवरात्रि, और कोजागिरी पूर्णिमा जैसे त्योहारों पर इस आरती का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
- माँ महालक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। उन्हें लाल पुष्प (जैसे कमल या गुड़हल), इत्र और मिठाई, विशेषकर खीर का भोग लगाना चाहिए।
- इस आरती का नियमित रूप से पाठ करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती, व्यापार में वृद्धि होती है और परिवार में सुख, शांति और positive energy का वास होता है।
