श्रीवाराहीद्वादशनामस्तोत्रम्

विनियोगः
अस्य श्रीवाराही द्वादशनामस्तोत्रस्य अश्वानन ऋषिः ।
अनुष्टुप्छन्दः । श्रीवाराही देवता ।
श्रीवाराहि प्रसादसिद्ध्यर्थं सर्वसङ्कटहरण जपे विनियोगः ।
पञ्चमी दण्डनाथा च सङ्केता समयेश्वरी ।
तथा समयसङ्केता वाराही पोत्रिणी शिवा ॥ १॥
वार्ताली च महासेनाऽऽज्ञाचक्रेश्वरी तथा ।
अरिघ्नी चेति सम्प्रोक्तं नाम द्वादशकं मुने ॥ २॥
नाम द्वादशधाभिज्ञ वज्रपञ्जरमध्यगः ।
सङ्कटे दुःखमाप्नोति न कदाचन मानवः ॥ ३॥
इति वाराहीद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
अस्य श्रीवाराही द्वादशनामस्तोत्रस्य अश्वानन ऋषिः ।
अनुष्टुप्छन्दः । श्रीवाराही देवता ।
श्रीवाराहि प्रसादसिद्ध्यर्थं सर्वसङ्कटहरण जपे विनियोगः ।
पञ्चमी दण्डनाथा च सङ्केता समयेश्वरी ।
तथा समयसङ्केता वाराही पोत्रिणी शिवा ॥ १॥
वार्ताली च महासेनाऽऽज्ञाचक्रेश्वरी तथा ।
अरिघ्नी चेति सम्प्रोक्तं नाम द्वादशकं मुने ॥ २॥
नाम द्वादशधाभिज्ञ वज्रपञ्जरमध्यगः ।
सङ्कटे दुःखमाप्नोति न कदाचन मानवः ॥ ३॥
इति वाराहीद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
संलिखित ग्रंथ पढ़ें
इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व
श्रीवाराहीद्वादशनामस्तोत्रम्, देवी वाराही के बारह सबसे शक्तिशाली और शुभ नामों का एक संक्षिप्त स्तोत्र है। 'द्वादश' का अर्थ है बारह। यह स्तुति देवी वाराही (Goddess Varahi) के मुख्य स्वरूपों का सार है, जिनमें पंचमी, दण्डनाथा, सङ्केता, समयेश्वरी, वाराही, पोत्रिणी, शिवा, वार्ताली, महासेना, आज्ञाचक्रेश्वरी और अरिघ्नी शामिल हैं। यह स्तोत्र एक 'वज्र पञ्जर' (diamond armor) के समान है। इसकी संक्षिप्तता के कारण इसे आसानी से कंठस्थ किया जा सकता है और इसका नित्य पाठ जीवन में एक अत्यंत शक्तिशाली और अभेद्य सुरक्षा कवच (protective shield) का निर्माण करता है, जो भक्त को किसी भी संकट में दुखी नहीं होने देता।
स्तोत्र के प्रमुख भाव और लाभ (फलश्रुति पर आधारित)
इस द्वादशनाम स्तोत्र की फलश्रुति (अंतिम श्लोक) इसके पाठ से प्राप्त होने वाले सबसे प्रमुख लाभ को स्पष्ट रूप से बताती है:
- संकट में अभेद्य सुरक्षा (Impenetrable Protection in Danger): फलश्रुति कहती है, "नाम द्वादशधाभिज्ञ वज्रपञ्जरमध्यगः । सङ्कटे दुःखमाप्नोति न कदाचन मानवः ॥" इसका अर्थ है - जो मनुष्य इन बारह नामों को जानता है, वह मानो एक वज्र के पिंजरे (diamond cage) के भीतर सुरक्षित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति संकट के समय में भी कभी दुःख को प्राप्त नहीं होता।
- शत्रुओं का नाश (Destruction of Enemies): स्तोत्र में देवी का एक नाम 'अरिघ्नी' है, जिसका सीधा अर्थ है 'शत्रुओं का नाश करने वाली'। इन बारह नामों के जाप से भक्तों के गुप्त और प्रकट सभी प्रकार के शत्रुओं (enemies) का शमन होता है।
- आज्ञा चक्र की जागृति (Activation of the Ajna Chakra): एक नाम 'आज्ञाचक्रेश्वरी' है, जो दर्शाता है कि देवी वाराही साधक के आज्ञा चक्र (third eye) पर शासन करती हैं। इन नामों के जाप से आध्यात्मिक उन्नति, अंतर्ज्ञान और मानसिक स्पष्टता में वृद्धि होती है।
- सर्व-संकट हरण (Removal of All Obstacles): विनियोग में ही इसका उद्देश्य "सर्वसङ्कटहरण" बताया गया है। यह स्तोत्र जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं और संकटों (obstacles and calamities) को दूर करता है।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
- यह एक अत्यंत संक्षिप्त और शक्तिशाली स्तोत्र है, इसलिए इसे अपनी नित्य पूजा (daily worship) में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
- प्रातःकाल या संध्याकाल में, विशेषकर रात्रि के समय, देवी वाराही का ध्यान करते हुए इन बारह नामों का कम से कम 11 बार जाप करें।
- नवरात्रि, विशेषकर गुप्त नवरात्रि, और प्रत्येक माह की पंचमी तिथि इस स्तोत्र के पाठ के लिए अत्यंत शुभ हैं।
- किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले, किसी नए कार्य को आरम्भ करने से पहले, या जब भी मन में किसी प्रकार का भय या असुरक्षा का भाव हो, तो इन बारह नामों का जाप तत्काल एक सुरक्षा कवच का निर्माण करता है।