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श्री आञ्जनेय नवरत्नमाला स्तोत्रम्

श्री आञ्जनेय नवरत्नमाला स्तोत्रम्
माणिक्यं -
ततो रावणनीतायाः सीतायाः शत्रुकर्शनः ।
इयेष पदमन्वेष्टुं चारणाचरिते पथि ॥ १॥

मुक्ता -
यस्य त्वेतानि चत्वारि वानरेन्द्र यथा तव ।
स्मृतिर्मतिर्धृतिर्दाक्ष्यं स कर्मसु न सीदति ॥ २॥

प्रवालं -
अनिर्वेदः श्रियो मूलं अनिर्वेदः परं सुखम् ।
अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः ॥ ३॥

मरकतं -
नमोऽस्तु रामाय सलक्ष्मणाय
देव्यै च तस्यै जनकजात्मजायै ।
नमोऽस्तु रुद्रेन्द्रयमानिलेभ्यः
नमोऽस्तु चन्द्रार्कमरुद्गणेभ्यः ॥ ४॥

पुष्यरागं -
प्रियान्न सम्भवेद्दुःखं अप्रियादधिकं भयम् ।
ताभ्यां हि ये वियुज्यन्ते नमस्तेषां महात्मनाम् ॥ ५॥

हीरकं -
रामः कमलपत्राक्षः सर्वसत्त्वमनोहरः ।
रूपदाक्षिण्यसम्पन्नः प्रसूतो जनकात्मजे ॥ ६॥

इन्द्रनीलं -
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः ।
राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः ।
दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः ।
हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः ॥ ७॥

गोमेधिकं -
यद्यस्ति पतिशुश्रूषा यद्यस्ति चरितं तपः ।
यदि वास्त्येकपत्नीत्वं शीतो भव हनुमतः ॥ ८॥

वैडूर्य -
निवृत्तवनवासं तं त्वया सार्धमरिन्दमम् ।
अभिषिक्तमयोध्यायां क्षिप्रं द्रक्ष्यसि राघवम् ॥ ९॥

॥ इति श्री आंजनेय नवरत्नमाला स्तोत्रम् ॥
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इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व

श्री आंजनेय नवरत्नमाला स्तोत्रम् एक अत्यंत अनूठी और सुंदर स्तुति है। इसकी विशेषता यह है कि यह कोई नई रचना नहीं, बल्कि वाल्मीकि रामायण के सुंदरकाण्ड से चुने गए नौ दिव्य श्लोकों का एक संग्रह है। 'नवरत्नमाला' का अर्थ है 'नौ रत्नों की माला'। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक एक रत्न (जैसे माणिक्य, मुक्ता, प्रवाल आदि) के समान है और यह भगवान हनुमान (Lord Hanuman), श्री राम, और सीता जी के संवादों और गुणों को दर्शाता है। यह स्तोत्र रामायण के सबसे मार्मिक और महत्वपूर्ण क्षणों को एक साथ पिरोता है, जिससे पाठक को सम्पूर्ण सुंदरकाण्ड का सार और पुण्य फल प्राप्त होता है।

नवरत्नों (श्लोकों) के प्रमुख भाव और लाभ

प्रत्येक 'रत्न' रूपी श्लोक एक विशेष गुण और लाभ का प्रतीक है:
  • माणिक्यं (Ruby): यह श्लोक हनुमान जी के सीता की खोज के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। इसका पाठ करने से कार्यों के प्रति दृढ़ निश्चय (determination) और सफलता प्राप्त होती है।
  • मुक्ता (Pearl): यह श्लोक हनुमान जी के चार गुणों - स्मृति, मति, धृति, और दाक्ष्य (याददाश्त, बुद्धि, धैर्य, और निपुणता) की प्रशंसा करता है। इसका पाठ करने से इन बौद्धिक गुणों (intellectual virtues) में वृद्धि होती है।
  • प्रवालं (Coral): यह श्लोक 'अनिर्वेद' अर्थात् उत्साह और कभी निराश न होने को ही सफलता और सुख का मूल बताता है। इसका पाठ करने से आशा और सकारात्मकता (hope and positivity) का संचार होता है।
  • इन्द्रनीलं (Blue Sapphire) & हीरकं (Diamond): ये श्लोक हनुमान जी द्वारा श्री राम के गुणों के वर्णन को दर्शाते हैं। इनका पाठ करने से भगवान राम की कृपा और भक्ति (devotion) प्राप्त होती है।
  • गोमेधिकं (Hessonite): यह सीता जी का वचन है, जिसमें वे अपने पातिव्रत्य धर्म की शक्ति से अग्नि को हनुमान के लिए शीतल होने का आदेश देती हैं। यह सत्य और धर्म की शक्ति का प्रतीक है।

पाठ करने की विधि और विशेष अवसर

  • यह एक संक्षिप्त और सारगर्भित स्तोत्र है, इसलिए इसे अपनी नित्य पूजा (daily worship) में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
  • प्रातःकाल स्नान के बाद हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठकर शुद्ध मन से इसका पाठ करें।
  • मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) को इस नवरत्नमाला का पाठ करना विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।
  • चूंकि यह स्तोत्र रामायण के सुंदरकाण्ड का सार है, इसलिए इसका पाठ करने से सुंदरकाण्ड के पाठ के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है।