श्रीभैरवसर्वफलप्रदस्तोत्रम्

श्रीभैरवसर्वफलप्रदस्तोत्रम्
ॐ भ्रं भैरवाय अनिष्टनिवारणाय स्वाहा ।
मम सर्वे ग्रहाः अनिष्टनिवारणाय स्वाहा ।
ज्ञानं देहि धनं देहि मम द्रारिद्रयदुःखनिवारणाय स्वाहा ।
सुतं देहि यशो देहि मम गृहक्लेशनिवारणाय स्वाहा ।
स्वास्थ्य देहि बलं देहि मम शत्रुनिवारणाय स्वाहा ।
सिद्धिं देहि जयं देहि मम सर्वॠणनिवारणाय स्वाहा ।
ॐ भ्रं भैरवाय अनिष्टनिवारणाय स्वाहा ।
इति श्रीभैरवसर्वफलप्रदस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
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सर्वफलप्रद स्तोत्र का महत्व (Significance)
श्रीभैरवसर्वफलप्रदस्तोत्रम् भगवान भैरव की एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। 'सर्वफलप्रद' का अर्थ है 'सभी फलों (इच्छाओं) को प्रदान करने वाला'। यह स्तोत्र जीवन की सभी प्रमुख समस्याओं के निवारण के लिए अचूक माना जाता है। इसमें साधक सीधे भगवान भैरव से अपनी कठिनाइयों, चाहे वे आर्थिक हों, शारीरिक हों या मानसिक, उन्हें दूर करने की प्रार्थना करता है।
स्तोत्र के लाभ (Benefits of Recitation)
इस स्तोत्र के मंत्रों में स्पष्ट रूप से उन बाधाओं का उल्लेख है जिनका निवारण इसके पाठ से होता है:
- अनिष्ट निवारण: सभी प्रकार के दुर्भाग्य और अनिष्ट का नाश।
- ग्रह शान्ति: कुंडली के दुष्ट ग्रहों के प्रभावों (विशेषकर शनि, राहु, केतु) का शमन।
- दारिद्र्य और ऋण मुक्ति: गरीबी (दारिद्र्य) और कर्ज (सर्वऋण) से मुक्ति।
- शत्रु विजय: गुप्त और प्रकट शत्रुओं से रक्षा और उन पर विजय।
- सुख-समृद्धि: धन, ज्ञान, यश, पुत्र (संतान) और स्वास्थ्य की प्राप्ति।
- गृह क्लेश निवारण: परिवार में चल रहे झगड़ों और अशांति का अंत।
पाठ विधि (Recitation Method)
इस स्तोत्र का पाठ रविवार, मंगलवार या अष्टमी तिथि को संध्याकाल में करना श्रेष्ठ है। पवित्रता के साथ बैठकर, भगवान भैरव का स्मरण करें और अपनी मनोकामना मन में रखकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें। "स्वाहा" शब्द के साथ पूर्ण समर्पण का भाव रखें।