श्रीआंजनेय द्वादशनामस्तोत्रम्

हनुमानंजनासूनुः वायुपुत्रो महाबलः ।
रामेष्टः फल्गुणसखः पिंगाक्षोऽमितविक्रमः ॥ १॥
उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशकः ।
लक्ष्मण प्राणदाताच दशग्रीवस्य दर्पहा ॥ २॥
द्वादशैतानि नामानि कपींद्रस्य महात्मनः ।
स्वापकाले पठेन्नित्यं यात्राकाले विशेषतः ।
तस्यमृत्यु भयंनास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥
रामेष्टः फल्गुणसखः पिंगाक्षोऽमितविक्रमः ॥ १॥
उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशकः ।
लक्ष्मण प्राणदाताच दशग्रीवस्य दर्पहा ॥ २॥
द्वादशैतानि नामानि कपींद्रस्य महात्मनः ।
स्वापकाले पठेन्नित्यं यात्राकाले विशेषतः ।
तस्यमृत्यु भयंनास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥
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इस स्तोत्र का विशिष्ट महत्व
श्रीआंजनेय द्वादशनामस्तोत्रम् भगवान हनुमान को समर्पित एक संक्षिप्त, किन्तु अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है। 'द्वादश' का अर्थ है बारह, और यह स्तोत्र भगवान हनुमान (Lord Hanuman) के बारह सबसे शुभ और प्रभावशाली नामों का एक सारगर्भित संग्रह है। प्रत्येक नाम हनुमान जी की एक प्रमुख लीला, गुण या शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे उनका जन्म, पराक्रम, राम-भक्ति और संकट-मोचन का सामर्थ्य। अपनी संक्षिप्तता के कारण यह स्तोत्र आसानी से कंठस्थ किया जा सकता है और इसका नित्य पाठ जीवन में एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच (protective shield) का निर्माण करता है।
स्तोत्र के प्रमुख भाव और लाभ (फलश्रुति पर आधारित)
इस द्वादशनाम स्तोत्र की फलश्रुति (अंतिम श्लोक) इसके पाठ से प्राप्त होने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण लाभों को स्पष्ट रूप से बताती है:
- मृत्यु भय का नाश (Removal of the Fear of Death): "तस्यमृत्यु भयं नास्ति" - यह इस स्तोत्र का सबसे बड़ा और प्रमुख लाभ है। जो व्यक्ति इन बारह नामों का नियमित रूप से, विशेषकर सोने से पहले या यात्रा के दौरान, स्मरण करता है, उसके मन से मृत्यु का भय (fear of death) और अकाल मृत्यु का संकट समाप्त हो जाता है।
- सर्वत्र विजय की प्राप्ति (Attainment of Victory Everywhere): "सर्वत्र विजयी भवेत्" - यह पंक्ति सुनिश्चित करती है कि इन नामों का जाप करने वाला भक्त जीवन के सभी क्षेत्रों में, चाहे वह शत्रु पर हो, किसी मुकदमे में हो, किसी परीक्षा में हो, या जीवन की किसी भी चुनौती में हो, उसे विजय (victory) प्राप्त होती है।
- संकटों से रक्षा (Protection from Dangers): नाम जैसे "सीताशोकविनाशकः" और "लक्ष्मणप्राणदाता" यह दर्शाते हैं कि हनुमान जी अपने भक्तों के सबसे बड़े संकटों को हरने वाले हैं। इन नामों का स्मरण करने से व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्ति से सुरक्षा मिलती है।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
- फलश्रुति के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ "स्वापकाले" अर्थात् सोने से ठीक पहले और "यात्राकाले" अर्थात् किसी भी यात्रा के आरंभ में करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
- आप इसका नित्य पाठ अपनी सुबह की पूजा के बाद भी कर सकते हैं। इसकी संक्षिप्तता के कारण इसे दिन में कई बार मन ही मन दोहराया जा सकता है।
- किसी भी नए कार्य को आरंभ करने से पहले इन बारह नामों का स्मरण करने से उस कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है।
- जब भी मन में किसी प्रकार का भय, चिंता या असुरक्षा का भाव उत्पन्न हो, तो इन बारह नामों का जाप तुरंत मानसिक शांति (mental peace) और बल प्रदान करता है।