नवनाग स्तोत्रम्

श्रीगणेशाय नमः
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् । शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥ १॥ एतानि नवनामानि नागानां च महात्मनाम् । सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः ॥ २॥ तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ३॥ ॥ इति श्रीनवनागनामस्तोत्रं समाप्तम् ॥संलिखित ग्रंथ पढ़ें
स्तोत्र का विशिष्ट महत्व और नाग देवता
नवनाग स्तोत्रम् (Navanaga Stotram) हिंदू धर्म के नौ प्रमुख नाग देवताओं की स्तुति है। पुराणों के अनुसार, नाग कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी कद्रू की संतान हैं। वे पाताल लोक के स्वामी हैं और पृथ्वी के संतुलन (balance of nature) के संरक्षक माने जाते हैं। इस स्तोत्र में जिन 9 नागों का उल्लेख है, वे अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य हैं: अनन्त (Ananta), वासुकि (Vasuki), शेष (Shesha), पद्मनाभ (Padmanabha), कम्बल (Kambala), शंखपाल (Shankhapala), धृतराष्ट्र (Dhritarashtra), तक्षक (Takshaka), और कालिय (Kaliya)।
काल सर्प दोष और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में काल सर्प दोष (Kaal Sarp Dosh) को जीवन में संघर्ष और बाधाओं का कारण माना जाता है। यह तब होता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं।
- दोष निवारण (Remedy): नवनाग स्तोत्र का नित्य पाठ काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
- राहु-केतु शांति: नाग देवताओं की पूजा से राहु और केतु (छाया ग्रह) शांत होते हैं, क्योंकि वे सर्प स्वरूप ही हैं।
फलश्रुति आधारित लाभ (Benefits)
स्तोत्र के अंतिम श्लोक में इसके फलों का स्पष्ट वर्णन है:
- विष भय से मुक्ति (Protection from Poison): "तस्य विषभयं नास्ति" - इसका पाठ करने वाले को सर्प दंश या किसी भी प्रकार के विष (शारीरिक या मानसिक) का भय नहीं रहता।
- सर्वत्र विजय (Victory Everywhere): "सर्वत्र विजयी भवेत्" - नाग देवता शक्ति और गुप्त धन के रक्षक हैं। उनकी कृपा से भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में विजय और सफलता (success) मिलती है।
- संतान प्राप्ति और सुरक्षा: नाग पूजा को वंश वृद्धि और संतान की रक्षा के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
पाठ करने की विधि और शुभ समय
- नाग पंचमी (Naga Panchami): श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को इसका पाठ करना सर्वश्रेष्ठ है।
- नित्य पाठ: श्लोक में निर्देश दिया गया है—"सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः"। अर्थात, इसे रोज सुबह और शाम को पढ़ना चाहिए।
- स्नान के बाद, शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें (क्योंकि शिव नागों के भूषण हैं) और फिर इस स्तोत्र का 9 बार पाठ करें।
- यदि सपने में सांप दिखाई देते हों, तो रात को सोने से पहले इसका पाठ करने से भय दूर होता है।