महाकाल भैरव स्तोत्रम्

ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते ।
महाकाल महायोगिन् महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ १॥
महाकाल महादेव महाकाल महाप्रभो ।
महाकाल महारुद्र महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ २॥
महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोऽपहन् ।
महाकाल महाकाल महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः ।
रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नमः ॥ ४॥
उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः ।
भीमाय च नमस्तुभ्यं ईशानाय नमो नमः ॥ ५॥
ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः ॥ ६॥
सद्योजात नमस्तुभ्यं शुक्लवर्ण नमो नमः ।
अधः कालाग्निरुद्राय रुद्ररूपाय वै नमः ॥ ७॥
स्थित्युत्पत्तिलयानां च हेतुरूपाय वै नमः ।
परमेश्वररूपस्त्वं नील एवं नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
पवनाय नमस्तुभ्यं हुताशन नमोऽस्तु ते ।
सोमरूप नमस्तुभ्यं सूर्यरूप नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
यजमान नमस्तुभ्यं आकाशाय नमो नमः ।
सर्वरूप नमस्तुभ्यं विश्वरूप नमोऽस्तु ते ॥ १०॥
ब्रह्मरूप नमस्तुभ्यं विष्णुरूप नमोऽस्तु ते ।
रुद्ररूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ ११॥
स्थावराय नमस्तुभ्यं जङ्गमाय नमो नमः ।
नमः स्थावरजङ्गमाभ्यां शाश्वताय नमो नमः ॥ १२॥
हुं हुङ्कार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमः ।
अनाद्यन्त महाकाल निर्गुणाय नमो नमः ॥ १३॥
प्रसीद मे नमो नित्यं मेघवर्ण नमोऽस्तु ते ।
प्रसीद मे महेशान दिग्वासाय नमो नमः ॥ १४॥
ॐ ह्रीं मायास्वरूपाय सच्चिदानन्दतेजसे ।
स्वाहा सम्पूर्णमन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः ॥ १५॥
॥ फलश्रुति ॥
इत्येवं देव देवस्य महाकालस्य भैरवि । कीर्तितं पूजनं सम्यक् साधकानां सुखावहम् ॥ १६॥
इत्येवं देव देवस्य महाकालस्य भैरवि । कीर्तितं पूजनं सम्यक् साधकानां सुखावहम् ॥ १६॥
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महाकाल भैरव स्तोत्रम् का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
महाकाल भैरव स्तोत्रम् भगवान शिव के सबसे उग्र और शक्तिशाली स्वरूप, महाकाल को समर्पित है। 'महाकाल' का अर्थ है 'महान समय' या 'समय का नियंत्रक'। यह स्तोत्र साधक को यह बोध कराता है कि काल (Time) ही परम सत्य है और महाकाल उस काल के भी स्वामी हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति मृत्यु (Death) और समय (Kala) के भय से मुक्त होता है। यह केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि यह शिव के पंचतत्व स्वरूपों (भवाय, शर्वाय, रुद्राय, उग्राय, भीमाय) को नमन करते हुए उनकी सर्वव्यापकता को स्वीकार करता है। यह स्तोत्र साधक को आंतरिक शक्ति (Power) और संरक्षण (Protection) प्रदान करता है, जिससे वह जीवन की बाधाओं को पार कर सके।
स्तोत्र की उत्पत्ति और संदर्भ (Origin and Context)
यह महाकाल स्तोत्रम् शैव परंपराओं और विशेष रूप से भैरव उपासना से जुड़ा हुआ है। यद्यपि इस विशिष्ट स्तोत्र का उल्लेख सीधे किसी एक प्रमुख पुराण में नहीं मिलता, यह तंत्र और आगम ग्रंथों में वर्णित महाकाल की स्तुतियों का सार प्रस्तुत करता है। महाकाल का सबसे प्रसिद्ध मंदिर उज्जैन में स्थित है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और जहाँ वे काल के अधिष्ठाता देव के रूप में पूजे जाते हैं। यह स्तोत्र भैरवि (Bhairavi) को संबोधित करते हुए कहा गया है (जैसा कि फलश्रुति में उल्लेख है), जो दर्शाता है कि यह संवाद तांत्रिक या गुरु-शिष्य परंपरा का हिस्सा है। इसका उद्देश्य साधकों को महाकाल की पूजा का सरल और प्रभावी तरीका प्रदान करना है।
श्लोकों का गहन दार्शनिक अर्थ (Deep Philosophical Meaning of Verses)
यह स्तोत्र केवल महाकाल के नाम का जाप नहीं है, बल्कि यह शिव के संपूर्ण ब्रह्मांडीय स्वरूप का वर्णन करता है। श्लोक 4 से 7 तक, यह भगवान शिव के अष्टमूर्ति स्वरूपों (जैसे भवाय, शर्वाय, रुद्राय, उग्राय, भीमाय, ईशानाय, महादेवाय) और पंचब्रह्म स्वरूपों (ईश्वराय, तत्पुरुषाय, सद्योजात) को नमन करता है। श्लोक 8 में, उन्हें स्थित्युत्पत्तिलयानां च हेतुरूपाय (The cause of creation, sustenance, and dissolution) कहा गया है। श्लोक 9 और 10 में, उन्हें पंचमहाभूतों (पवन, हुताशन, सोम, सूर्य, आकाश) और यजमान (यज्ञकर्ता) के रूप में पूजा जाता है। अंतिम श्लोक (15) अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो तांत्रिक बीज मंत्रों (ॐ ह्रीं) और अद्वैत दर्शन के सार (सोऽहं हंस) को जोड़ता है, यह दर्शाता है कि साधक स्वयं को महाकाल के सच्चिदानन्द (Sat-Chit-Ananda) स्वरूप में विलीन कर रहा है।
महाकाल स्तोत्र पाठ के प्रमुख लाभ (Key Benefits of Reciting Mahakala Stotram)
इस स्तोत्र का नियमित पाठ साधकों को कई भौतिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है, जैसा कि फलश्रुति में भी वर्णित है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत प्रभावी है जो जीवन में बड़े संकटों (Crises) या अज्ञात भय (Unknown Fears) का सामना कर रहे हैं।
- काल भय से मुक्ति: यह स्तोत्र मृत्यु के भय (काल भय) को समाप्त करता है और व्यक्ति को दीर्घायु तथा आरोग्य (Health) प्रदान करता है।
- शत्रु बाधा निवारण: महाकाल भैरव शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले माने जाते हैं, जिससे साधक को विजय (Victory) प्राप्त होती है।
- ग्रह दोष शांति: विशेष रूप से शनि, राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने में यह स्तोत्र सहायक है।
- मोक्ष की प्राप्ति: अंतिम श्लोक में निहित 'सोऽहं हंस' भाव के कारण, यह स्तोत्र आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष (Liberation) की ओर ले जाता है।
स्तोत्र पाठ करने की सही विधि (Proper Method of Recitation)
महाकाल भैरव स्तोत्र का पाठ करते समय शुद्धता और एकाग्रता आवश्यक है। चूंकि महाकाल उग्र देवता हैं, इसलिए पाठ करते समय नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
- समय: इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल (शाम) या रात्रि का होता है। मंगलवार, शनिवार, और मासिक शिवरात्रि, काल भैरव अष्टमी तथा अमावस्या के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
- शुद्धि: साधक को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। महाकाल की पूजा में काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
- संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले अपनी मनोकामना या संकल्प (Intention) स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
- आसन: रुद्राक्ष की माला का उपयोग करते हुए, एकाग्र मन से कम से कम 11, 21, या 108 बार स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पाठ के दौरान महाकाल के उग्र स्वरूप का ध्यान (Meditation) करें।