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श्रीहनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रम्

श्रीहनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रम्

॥ हनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रम् ॥

॥ ब्रह्मोवाच ॥ सुन्दरं हनुमान्मन्त्रमिदमेव हरीश्वरा । ॐ हनुमान् अञ्जनासूनुः वायुपुत्रो महाबलः । कपीन्द्रो पिङ्गलाक्षश्च लङ्काद्वीपभयङ्करः ॥ १॥ प्रभञ्जनसुतो वीरस्सीताशोकविनाशकः । अक्षहन्ता रामसखा रामकार्यधुरन्धरः ॥ २॥ महौषधगिरेर्हारी वानरप्राणदायकः । वागीशतारकश्चैव मैनाकगिरिभञ्जनः ॥ ३॥ निरञ्जनो जितक्रोधो कदलीवनसंवृतः । ऊर्ध्वरेता महासत्त्वा सर्वमन्त्रप्रवर्तकः ॥ ४॥ महालिङ्गप्रतिष्ठाता भाष्यकृत् जपतांवरः । शिवध्यानपरोनित्यं शिवपूजापरायणः ॥ ५॥ ॥ इति हनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

स्तोत्र का विशिष्ट महत्व (Significance & Importance)

श्रीहनुमदष्टाविंशतिनामस्तोत्रम् (Shri Hanumad Ashtavimshatinama Stotram) भगवान हनुमान के 28 (अष्टाविंशति) दिव्य नामों का एक अत्यंत प्रभावशाली संग्रह है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं ब्रह्मा जी ने इस स्तोत्र का उपदेश दिया था। यह एक छोटा लेकिन शक्तिशाली पाठ है जिसे "सुन्दरं हनुमान्मन्त्रमिदम्" (यह सुंदर हनुमान मंत्र) कहा गया है। यह स्तोत्र हनुमान जी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और लीलाओं को संक्षिप्त नामों के रूप में प्रस्तुत करता है।

28 नामों का गूढ़ भावार्थ (Deep Meaning of 28 Names)

इस स्तोत्र में वर्णित 28 नाम हनुमान जी के संपूर्ण चरित्र का सार हैं:
  • हनुमान् (Hanuman): टूटी हुई ठोड़ी वाले, जो इंद्र के वज्र के प्रहार का चिह्न है और उनकी अमरता का प्रतीक है।
  • अञ्जनसूनु (Anjanasunu): माता अंजना के पुत्र।
  • वायुपुत्र (Vayuputra): पवन देव के पुत्र, जो असीम बल और गति के स्रोत हैं।
  • महाबल (Mahabala): अतुलित बल के धाम।
  • रामेष्ट (Rameshta): भगवान राम के अत्यंत प्रिय।
  • फाल्गुनसख (Phalgunasakha): अर्जुन (फाल्गुन) के सखा (मित्र), क्योंकि महाभारत युद्ध में वे उनकी ध्वजा पर विराजमान थे।
  • पिङ्गलाक्ष (Pingalaksha): लाल-पीली (Tawny) आँखों वाले।
  • अमितविक्रम (Amitavikrama): असीम पराक्रम वाले।
  • उदधिक्रमण (Udadhi-kramana): समुद्र को लांघने वाले।
  • सीताशोकविनाशन (Sita-shoka-vinashana): माता सीता के शोक का नाश करने वाले।
  • लक्ष्मणप्राणदाता (Lakshmana-pranadata): संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले।
  • दशग्रीवदर्पहा (Dashagriva-darpaha): रावण (दशग्रीव) के घमंड को चूर करने वाले।
  • (और इसी प्रकार अन्य नाम जैसे कपीश्वर, महाकाय, भक्तकाजसाधक आदि...)

फलश्रुति आधारित लाभ (Actual Benefits)

स्तोत्र के अंत में और इसके नामों के स्मरण से मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं:
  • सर्वमन्त्रप्रवर्तक (Initiator of All Mantras): श्लोक 4 में उन्हें "सर्वमन्त्रप्रवर्तकः" कहा गया है। इसका अर्थ है कि हनुमान जी की कृपा से अन्य सभी मंत्र सिद्ध और प्रभावी हो जाते हैं।
  • शिव पूजा का फल: श्लोक 5 में कहा गया है कि जो इनका पाठ करता है, वह "शिवध्यानपरोनित्यं शिवपूजापरायणः" (नित्य शिव ध्यान और पूजा में लीन) माना जाता है। यह शैव और वैष्णव मत का अद्भुत समन्वय है।
  • संकट और भय नाश: "लङ्काद्वीपभयङ्करः"—जैसे वे लंका के लिए भयंकर थे, वैसे ही वे भक्त के जीवन के सभी भयों और संकटों (crisis) का नाश करते हैं।
  • कार्य सिद्धि: "रामकार्यधुरन्धरः"—जो राम जी के कार्यों का भार उठाने वाले हैं, वे अपने भक्तों के कार्यों (tasks) को भी निर्विघ्न पूर्ण करते हैं।

पाठ करने की विधि और शुभ समय (How to Recite for Best Results)

  • नित्य पाठ: प्रातःकाल स्नान के बाद, पूजा करते समय इन 28 नामों का पाठ करना अत्यंत शुभ है। यह दिन भर रक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
  • विशेष अवसर: हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार को लाल फूल और सिंदूर चढ़ाकर 11 या 108 बार पाठ करें।
  • यात्रा के समय: घर से निकलते समय या यात्रा शुरू करने से पहले इन नामों का स्मरण करने से यात्रा निर्विघ्न संपन्न होती है।
  • सोने से पहले: रात को सोने से पहले पाठ करने से बुरे सपने नहीं आते और मन शांत रहता है।