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उच्छिष्टगणपति-उच्छिष्टचाण्डालिन्युपासना पञ्चाङ्गम् | Uchchishta Ganapati Panchanga

उच्छिष्टगणपति-उच्छिष्टचाण्डालिन्युपासना पञ्चाङ्गम्

उच्छिष्टगणपति पञ्चाङ्गम् तांत्रिक गणेश उपासना का सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत ग्रंथ है। इसमें उच्छिष्ट गणपति की संपूर्ण साधना-पद्धति का वर्णन है। "पञ्चाङ्ग" का अर्थ है पाँच अंग - यह ग्रंथ पाँच प्रमुख भागों में विभाजित है, जो साधक को क्रमबद्ध उपासना का मार्ग प्रदान करते हैं।

यह ग्रंथ मन्त्रमहोदधि, रुद्रयामल तन्त्र और अन्य प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों से संकलित है। इसमें नवार्ण, द्वादशाक्षर, एकोनविंशति, सप्तत्रिंशत् आदि विभिन्न मन्त्रों का विस्तृत विधान दिया गया है।

विशेष सूचना: यह तांत्रिक उपासना पद्धति है। इसका अनुष्ठान केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। बिना दीक्षा के इन मन्त्रों का प्रयोग वर्जित है।

पञ्चाङ्ग - पाँच प्रमुख अंग

उच्छिष्टगणपति पञ्चाङ्गम् के पाँच प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं। प्रत्येक भाग का विस्तृत पाठ अलग पृष्ठ पर उपलब्ध है:

१. उच्छिष्टगणपतिपटलम् (मन्त्र प्रयोग)

इसमें विभिन्न अक्षर संख्या के मन्त्रों का विस्तृत प्रयोग विधान है:

  • नवार्ण मन्त्र प्रयोग (9 अक्षर)
  • द्वादशाक्षर मन्त्र प्रयोग (12 अक्षर)
  • एकोनविंशत्यक्षर मन्त्र प्रयोग (19 अक्षर)
  • सप्तत्रिंशदक्षर मन्त्र प्रयोग (37 अक्षर)
  • एकत्रिंशदक्षर मन्त्र प्रयोग (31 अक्षर)
  • द्वात्रिंशदक्षर मन्त्र प्रयोग (32 अक्षर)

पूर्ण पाठ पढ़ें: मन्त्र प्रयोग →


२. श्रीमदुच्छिष्टगणपतिपूजापद्धतिः

संपूर्ण षोडशोपचार पूजा विधि: पुरश्चरण विधि, प्रातःस्मरण, स्नान प्रयोग, न्यास विधि, पूजा विधान, होम विधि।

पूर्ण पाठ पढ़ें: पूजा पद्धति →


३. श्रीमदुच्छिष्टगणेशकवचम्

रक्षार्थ कवच स्तोत्र: सम्पूर्ण शरीर रक्षा, विघ्न निवारण, शत्रु नाश।

पूर्ण पाठ पढ़ें: गणेश कवचम् →


४. श्रीमदुच्छिष्टगणपतिसहस्रनामस्तोत्रम्

उच्छिष्ट गणपति के 1000 दिव्य नाम: प्रत्येक नाम का अर्थ, जप विधि, फल श्रुति।

पूर्ण पाठ पढ़ें: सहस्रनाम स्तोत्रम् →


५. श्रीमदुच्छिष्टगणेशस्तवराजः

सर्वश्रेष्ठ स्तुति: भक्तिपूर्ण स्तवन, महिमा वर्णन, फलश्रुति।

पूर्ण पाठ पढ़ें: स्तवराजः →

🔱 उच्छिष्टचाण्डालिनी उपासना (अतिरिक्त भाग)

पञ्चाङ्ग के साथ ही उच्छिष्टचाण्डालिनी देवी की उपासना का विधान भी दिया गया है। यह शक्ति गणपति की सहचरी हैं।

  • उच्छिष्टचाण्डालिनी मन्त्राः
  • चेटक प्रयोग

पूर्ण पाठ पढ़ें: उच्छिष्टचाण्डालिनी उपासना →

पञ्चाङ्ग का महत्व

क्रमबद्ध साधना

पञ्चाङ्ग में पाँच अंगों को एक विशेष क्रम में रखा गया है:

  1. पटलम् - पहले मन्त्र सिद्धि
  2. पूजापद्धति - फिर विधिवत पूजा
  3. कवचम् - रक्षा हेतु कवच धारण
  4. सहस्रनाम - नाम जप से प्रसन्नता
  5. स्तवराज - अंत में स्तुति द्वारा कृपा प्राप्ति

फल प्राप्ति

  • सर्व विघ्न निवारण
  • धन-धान्य वृद्धि
  • शत्रु नाश
  • वशीकरण सिद्धि
  • राज्य प्राप्ति

सामान्य प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: उच्छिष्ट गणपति कौन हैं?

उच्छिष्ट गणपति भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से एक तांत्रिक स्वरूप हैं। "उच्छिष्ट" का अर्थ है भोजन के पश्चात् का अवशेष - यह स्वरूप उस अवस्था में पूजित होता है। ये अत्यंत शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।

प्रश्न 2: क्या बिना गुरु दीक्षा के इस पञ्चाङ्ग का पाठ किया जा सकता है?

तांत्रिक मन्त्रों के प्रयोग के लिए दीक्षा अनिवार्य है। हालांकि, शुद्ध भावना से कवच और सहस्रनाम का पाठ श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है। मन्त्र जप और होम के लिए गुरु मार्गदर्शन आवश्यक है।

प्रश्न 3: पञ्चाङ्ग में कौन से मुख्य मन्त्र हैं?

प्रमुख मन्त्र हैं:

  • नवार्ण मन्त्र: "हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा" (9 अक्षर)
  • द्वादशाक्षर मन्त्र: "ॐ ह्रीं गँ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा" (12 अक्षर)
  • सप्तत्रिंशदक्षर मन्त्र: विस्तृत 37 अक्षरों का मन्त्र

प्रश्न 4: पुरश्चरण कितने जप का करना चाहिए?

नवार्ण मन्त्र का पुरश्चरण एक लाख जप है। इसके बाद दशांश (10,000) तिल होम, फिर तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन करना चाहिए।

प्रश्न 5: उच्छिष्ट गणपति का ध्यान कैसा है?

"चतुर्भुजं रक्ततनुं त्रिनेत्रं पाशाङ्कुशौ मोदकपात्रदन्तौ। करैर्दधानं सरसीरुहस्थमुन्मत्तमुच्छिष्टगणेशमीडे॥"



अर्थात्: चार भुजाओं वाले, रक्त वर्ण शरीर, तीन नेत्र, हाथों में पाश, अंकुश, मोदक पात्र और दंत धारण करने वाले, कमल पर विराजमान उन्मत्त उच्छिष्ट गणेश की मैं स्तुति करता हूँ।

प्रश्न 6: कवचम् का पाठ कब करना चाहिए?

कवचम् का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात् या पूजा के समय करना चाहिए। विशेष रूप से जब किसी संकट या शत्रु भय हो तब कवच पाठ अत्यंत लाभकारी है।

प्रश्न 7: सहस्रनाम पाठ का क्या फल है?

सहस्रनाम पाठ से सर्व कामना पूर्ति, विघ्न निवारण, धन प्राप्ति, संतान सुख, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नियमित पाठ से गणपति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

प्रश्न 8: उच्छिष्टचाण्डालिनी कौन हैं?

उच्छिष्टचाण्डालिनी उच्छिष्ट गणपति की शक्ति हैं। ये तांत्रिक देवी हैं जिनकी उपासना गणपति साधना के साथ की जाती है। इनके मन्त्र अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली हैं।

प्रश्न 9: पञ्चाङ्ग का स्रोत क्या है?

यह पञ्चाङ्ग मुख्यतः मन्त्रमहोदधि और रुद्रयामल तन्त्र से संकलित है। ये दोनों प्राचीन तांत्रिक ग्रंथ हैं जिनमें गणेश की तांत्रिक उपासना का विस्तृत वर्णन है।

प्रश्न 10: क्या गृहस्थ इस साधना को कर सकते हैं?

हाँ, गृहस्थ भी गुरु दीक्षा लेकर इस साधना को कर सकते हैं। हालांकि, साधना काल में कुछ नियमों का पालन करना होता है जैसे ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन, और नियमित पूजा आदि।

।। ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।