भैरव द्वाविंशति नामावलिः
Bhairava Dvadashavimshati (22) Namavali

ॐ बटुकनाथाय नमः ।
ॐ सारभूताय नमः ।
ॐ त्रैलोक्यनाथनाथाय नमः ।
ॐ नाथनाथाय नमः ।
ॐ बटुकाय नमः ।
ॐ कालिकानाथाय नमः ।
ॐ कामदाय नमः ।
ॐ लोकरक्षकाय नमः ।
ॐ भूतनाथाय नमः ।
ॐ गणश्रेष्ठाय नमः । १०॥
ॐ वीरवन्द्याय नमः ।
ॐ दयानिधये नमः ।
ॐ कपालिने नमः ।
ॐ कुण्डलिने नमः ।
ॐ भीमाय नमः ।
ॐ भैरवाय नमः ।
ॐ भीमविक्रमाय नमः ।
ॐ व्यालयज्ञोपवीतिने नमः ।
ॐ कवचिने नमः ।
ॐ शूलिने नमः । २०॥
ॐ शूराय नमः ।
ॐ शिवप्रियाय नमः । २२॥
॥ इति भैरवद्वादशविंशतिनामावलिः सम्पूर्णा ॥
भैरव द्वाविंशति नामावलि का परिचय और महत्व (Introduction and Significance)
भैरव द्वाविंशति नामावलि (Bhairava Dvivimshati Namavali) भगवान भैरव के 22 पवित्र नामों का एक शक्तिशाली संग्रह है। यद्यपि संस्कृत में इसे 'द्वादशविंशति' कहा गया है, यह स्पष्ट रूप से 22 नामों को संदर्भित करता है (जैसा कि पाठ में 22॥ पर समाप्त होता है)। यह नामावलि विशेष रूप से भगवान भैरव के सौम्य रूप बटुकनाथ (Batuknath) से आरंभ होती है, जो भक्तों को सुरक्षा और त्वरित फल प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। नामावलि का पाठ करना मंत्र जप का एक सरल और प्रभावी तरीका है, जिसमें प्रत्येक नाम भगवान के विशिष्ट गुण और शक्ति को दर्शाता है। यह नामावलि साधक को भय मुक्ति: (Freedom from Fear) और जीवन में आने वाली बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करती है।
नामावलि का उद्गम और संरचना (Origin and Structure)
यह नामावलि मुख्य रूप से तंत्र शास्त्र (Tantra Shastra) और शैव परंपराओं से जुड़ी हुई है, जहाँ भैरव को भगवान शिव का उग्र और संरक्षक स्वरूप माना जाता है। इस नामावलि की संरचना अत्यंत व्यवस्थित है, जो बटुकनाथ के रूप से शुरू होकर उनके भयानक (भीम) और वीर गुणों (शूर) पर समाप्त होती है। 22 नाम भैरव के उन विशिष्ट पहलुओं को उजागर करते हैं जो उन्हें कालिकानाथ (Lord of Kali) और त्रैलोक्यनाथनाथाय (Lord of the Lords of Three Worlds) बनाते हैं। यह संग्रह दर्शाता है कि भैरव न केवल संहारक हैं, बल्कि वे दयानिधये: (Treasure of Compassion) भी हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
प्रमुख नामों का गहन आध्यात्मिक अर्थ (Deep Spiritual Meaning of Key Names)
नामावलि में प्रयुक्त प्रत्येक नाम भैरव के गूढ़ स्वरूप को प्रकट करता है। कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण नाम और उनके अर्थ निम्नलिखित हैं:
OM Batuknathaya Namah: बटुकनाथ भैरव का बाल रूप है, जो तुरंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों को स्नेहपूर्ण सुरक्षा देते हैं। यह नाम सरलता: (Simplicity) और तत्काल कृपा: (Immediate Grace) को दर्शाता है।
OM Kalikanathaya Namah: यह नाम दर्शाता है कि भैरव देवी काली के स्वामी हैं, जो उन्हें समय और मृत्यु पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है।
OM Kapaline Namah: कपाल धारण करने वाले, यह नाम उनकी वैराग्य: (Detachment) और संहारक शक्ति को दर्शाता है, जो अहंकार का नाश करते हैं।
OM Bhimavikramaya Namah: भयानक पराक्रम वाले। यह नाम उनकी उस शक्ति को दर्शाता है जिससे वे बड़े से बड़े शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का पाप नाश: (Annihilation) कर सकते हैं।
OM Vyalayajnopavitine Namah: सर्पों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने वाले। यह नाम उनकी मनोकामना पूर्ति: (Yogic Power) और प्रकृति पर उनके प्रभुत्व को दर्शाता है।
नामावलि पाठ के लाभ और फलश्रुति (Benefits and Results of Recitation)
द्वादशविंशति नामावलि का नियमित पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं। भैरव को क्षेत्रपाल (Guardian of the Region) भी कहा जाता है, इसलिए यह नामावलि विशेष रूप से सुरक्षा (Protection) के लिए अत्यंत प्रभावी है।
शत्रु बाधा निवारण: यह नामावलि शत्रुओं, गुप्त विरोधियों और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा कवच: (Protective Shield) प्रदान करती है।
भय और चिंता से मुक्ति: बटुकनाथ का स्मरण करने से सभी प्रकार के मानसिक भय: (Mental Fears) और अनिश्चितता समाप्त होती है।
न्यायिक सफलता: कानूनी मामलों और विवादों में सफलता प्राप्त करने के लिए यह पाठ बहुत शुभ माना जाता है।
आध्यात्मिक उन्नति: यह नामावलि साधक को शिव तत्व: (Shiva Principle) के करीब लाती है और मोक्ष मार्ग में सहायता करती है।
नामावलि पाठ की सही विधि (Correct Method of Recitation)
भैरव नामावलि का पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है ताकि पूर्ण फल प्राप्त हो सके। भैरव की पूजा मुख्य रूप से कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (कालाष्टमी) या रविवार के दिन की जाती है।
- शुद्धि और आसन: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ (Auspicious) माना जाता है।
- दीप प्रज्वलन: भैरव की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले अपनी मनोकामना (इच्छा) का संकल्प (Intention) लें।
- जप संख्या: नामावलि का पाठ कम से कम 11, 21, या 108 बार किया जाना चाहिए। प्रत्येक नाम के बाद 'नमः' का उच्चारण अनिवार्य है।
- भोग: भैरव को मीठी रोटी, गुड़ या उड़द दाल से बने व्यंजन का भोग लगाना चाहिए।
भैरव और बटुकनाथ का द्वैत स्वरूप (Dual Nature of Bhairava and Batuknath)
यह नामावलि भैरव के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़ती है: बटुकनाथ (बाल स्वरूप) और भैरव (उग्र स्वरूप)। बटुकनाथ (Batuknath) भैरव का सबसे सौम्य रूप है, जो भक्तों के लिए अत्यंत सुलभ और दयालु है। यह रूप मुख्य रूप से विद्या: (Knowledge) और सुरक्षा: (Protection) प्रदान करता है। इसके विपरीत, भैरव का उग्र रूप (जैसे काल भैरव) दंड देने वाला और संहारक है। इस नामावलि का पाठ करने वाला साधक बटुकनाथ की कृपा से उग्र भैरव की शक्ति को भी नियंत्रित करने की क्षमता प्राप्त करता है, जिससे वह जीवन में आने वाली हर चुनौती का सामना साहस: (Courage) के साथ कर पाता है।