श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशतनामावली
Anjaneya Ashtottarashatanamavali (108 Names)

॥ ध्यानम् ॥ ॐ मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शिरसा नमामि ॥
॥ नामावली ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
ॐ आञ्जनेयाय नमः ।
ॐ महावीराय नमः ।
ॐ हनूमते नमः ।
ॐ मारुतात्मजाय नमः ।
ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः ।
ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमः ।
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः ।
ॐ सर्वमायाविभञ्जनाय नमः ।
ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः ।
ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः । १०
ॐ परविद्यापरिहर्त्रे नमः ।
ॐ परशौर्यविनाशनाय नमः ।
ॐ परमन्त्रनिराकर्त्रे नमः ।
ॐ परयंत्रप्रभेदकाय नमः ।
ॐ सर्वग्रहविनाशकाय नमः ।
ॐ भीमसेनसहाय्यकृते नमः ।
ॐ सर्वदुःखहराय नमः ।
ॐ सर्वलोकचारिणे नमः ।
ॐ मनोजवाय नमः ।
ॐ पारिजातद्रुमूलस्थाय नमः । २०
ॐ सर्वमंत्रस्वरूपवते नमः ।
ॐ सर्वतंत्रस्वरूपिणे नमः ।
ॐ सर्वयन्त्रात्मिकाय नमः ।
ॐ कपीश्वराय नमः ।
ॐ महाकायाय नमः ।
ॐ सर्वरोगहराय नमः ।
ॐ प्रभवे नमः ।
ॐ बलसिद्धिकराय नमः ।
ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमः ।
ॐ कपिसेनानायकाय नमः । ३०
ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः ।
ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः ।
ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः ।
ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलंबमानशिखोज्ज्वलाय नमः ।
ॐ गन्धर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमः ।
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः ।
ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमः ।
ॐ शृंखलाबन्धमोचकाय नमः ।
ॐ सागरोत्तारकाय नमः ।
ॐ प्राज्ञाय नमः । ४०
ॐ रामदूताय नमः ।
ॐ प्रतापवते नमः ।
ॐ वानराय नमः ।
ॐ केसरीसूनवे नमः ।
ॐ सीताशोकनिवारणाय नमः ।
ॐ अञ्जनागर्भसंभूताय नमः ।
ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः ।
ॐ विभीषणप्रियकराय नमः ।
ॐ दशग्रीवकुलांतकाय नमः ।
ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः । ५०
ॐ वज्रकायाय नमः ।
ॐ महाद्युतये नमः ।
ॐ चिरञ्जीविने नमः ।
ॐ रामभक्ताय नमः ।
ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः ।
ॐ अक्षहन्त्रे नमः ।
ॐ काञ्चनाभाय नमः ।
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः ।
ॐ महातपसे नमः ।
ॐ लंकिणीभञ्जनाय नमः । ६०
ॐ श्रीमते नमः ।
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः ।
ॐ गन्धमादनशैलस्थाय नमः ।
ॐ लंकापुरविदाहकाय नमः ।
ॐ सुग्रीवसचिवाय नमः ।
ॐ धीराय नमः ।
ॐ शूराय नमः ।
ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः ।
ॐ सुरार्चिताय नमः ।
ॐ महातेजसे नमः । ७०
ॐ रामचूडामणिप्रदाय नमः ।
ॐ कामरूपिणे नमः ।
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः ।
ॐ वर्धिमैनाकपूजिताय नमः ।
ॐ कबलीकृतमार्ताण्डमण्डलाय नमः ।
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः ।
ॐ रामसुग्रीवसंधात्रे नमः ।
ॐ महिरावणमर्दनाय नमः ।
ॐ स्फटिकाभाय नमः ।
ॐ वागधीशाय नमः । ८०
ॐ नवव्याकृतिपण्डिताय नमः ।
ॐ चतुर्बाहवे नमः ।
ॐ दीनबन्धवे नमः ।
ॐ महात्मने नमः ।
ॐ भक्तवत्सलाय नमः ।
ॐ संजीवननगाहर्त्रे नमः ।
ॐ शुचये नमः ।
ॐ वाग्मिने नमः ।
ॐ धृतव्रताय नमः ।
ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः । ९०
ॐ हरिर्मर्कट मर्कटाय नमः ।
ॐ दान्ताय नमः ।
ॐ शान्ताय नमः ।
ॐ प्रसन्नात्मने नमः ।
ॐ दशकण्ठमदापहाय नमः ।
ॐ योगिने नमः ।
ॐ रामकथालोलाय नमः ।
ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय नमः ।
ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः ।
ॐ वज्रनखाय नमः । १००
ॐ रुद्रवीर्यसमुद्भवाय नमः ।
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवर्तकाय नमः ।
ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासाय नमः ।
ॐ शरपञ्जरहेलकाय नमः ।
ॐ दशबाहवे नमः ।
ॐ लोकपूज्याय नमः ।
ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः ।
ॐ सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरंधराय नमः । १०८
॥ इति श्रीमद् आञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामावली सम्पूर्णा ॥
इस नामावली का विशिष्ट महत्व
श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशतनामावली (Anjaneya Ashtottarashatanamavali) भगवान हनुमान के 108 दिव्य और चमत्कारी नामों का एक पवित्र संग्रह है। हिंदू धर्म में, "अष्टोत्तरशत" का अर्थ है 108, जो एक अत्यंत शुभ संख्या मानी जाती है। यह नामावली केवल नामों की सूची नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली स्तोत्र है जिसमें प्रत्येक नाम एक बीज मंत्र के समान कार्य करता है। हर नाम भगवान हनुमान (Lord Hanuman) के एक विशेष गुण, पराक्रम, लीला या स्वरूप का वर्णन करता है। इन नामों का भक्तिपूर्वक जप करने से भक्त सीधे तौर पर हनुमान जी की ऊर्जा से जुड़ता है और उनकी असीम कृपा का पात्र बनता है। यह स्तुति शक्ति, भक्ति और सुरक्षा का त्रिवेणी संगम है।
नामावली के प्रमुख भाव और लाभ
हनुमान जी के इन 108 नामों का पाठ करने से भक्तों को विभिन्न प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं:
संकटों और बाधाओं से मुक्ति (Relief from Dangers and Obstacles): नाम जैसे 'सर्वदुःखहराय' (सभी दुखों को हरने वाले), 'सर्वबन्धविमोक्त्रे' (सभी बंधनों से मुक्त करने वाले), और 'कारागृहविमोक्त्रे' (कारागार से छुड़ाने वाले) यह दर्शाते हैं कि इनके जप से जीवन के बड़े से बड़े संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
शारीरिक और मानसिक शक्ति (Physical and Mental Strength): 'महावीराय' (महान वीर), 'वज्रकायाय' (वज्र के समान शरीर वाले), और 'महाबलपराक्रमाय' (महान बल और पराक्रम वाले) जैसे नाम साधक को शारीरिक बल, अच्छा स्वास्थ्य (good health) और मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों से सुरक्षा (Protection from Negative Energy and Planets): 'सर्वग्रहविनाशकाय' (सभी ग्रहों के बुरे प्रभाव को नष्ट करने वाले) और 'रक्षोविध्वंसकारकाय' (राक्षसों का विध्वंस करने वाले) नाम भक्तों की सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत और ज्योतिषीय दोषों से रक्षा करते हैं।
ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति (Attainment of Knowledge and Intellect): 'तत्त्वज्ञानप्रदाय' (तत्त्वज्ञान प्रदान करने वाले), 'प्राज्ञाय' (अत्यंत बुद्धिमान), और 'नवव्याकृतिपण्डिताय' (नौ व्याकरणों के ज्ञाता) जैसे नामों के जप से विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है, जिससे सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
श्री राम की भक्ति की प्राप्ति (Attainment of Devotion to Shri Rama): 'रामदूताय', 'रामभक्ताय', और 'सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरंधराय' जैसे नाम यह सुनिश्चित करते हैं कि हनुमान जी की कृपा से साधक को भगवान श्री राम के चरणों की अविचल भक्ति प्राप्त होती है, जो जीवन का परम लक्ष्य है।
पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
इस नामावली का पाठ करने के लिए सबसे उत्तम दिन मंगलवार (Tuesday) और शनिवार (Saturday) माने जाते हैं।
प्रातःकाल स्नान के बाद, हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर शुद्ध मन से इसका पाठ करना चाहिए।
पाठ करते समय हनुमान जी को सिन्दूर (Sindoor), चमेली का तेल, लाल पुष्प और गुड़-चने का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायक होता है।
प्रत्येक नाम के अंत में "नमः" लगाकर, इसे एक माला (108 बार) के रूप में भी जपा जा सकता है। इससे एकाग्रता (concentration) और भक्ति भाव में वृद्धि होती है।
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) और रामनवमी जैसे विशेष पर्वों पर इस नामावली का पाठ करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।