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श्री भैरव कवचम् (तांत्रोक्त)

Shri Bhairava Kavacham

श्री भैरव कवचम् (तांत्रोक्त)
॥ अथ श्रीभैरवकवचम् ॥ॐ सहस्त्रारे महाचक्रेकर्पूरधवले गुरुः।
पातु मां बटुको देवोभैरवः सर्वकर्मसु॥१॥
पूर्वस्यामसिताङ्गो मांदिशि रक्षतु सर्वदा।
आग्नेयां च रुरुः पातुदक्षिणे चण्ड भैरवः॥२॥
नैॠत्यां क्रोधनः पातुउन्मत्तः पातु पश्चिमे।
वायव्यां मां कपाली चनित्यं पायात् सुरेश्वरः॥३॥
भीषणो भैरवः पातुउत्तरास्यां तु सर्वदा।
संहार भैरवःपायादीशान्यां च महेश्वरः॥४॥
ऊर्ध्वं पातु विधाता चपाताले नन्दको विभुः।
सद्योजातस्तु मां पायात्सर्वतो देवसेवितः॥५॥
रामदेवो वनान्ते चवने घोरस्तथावतु।
जले तत्पुरुषः पातुस्थले ईशान एव च॥६॥
डाकिनी पुत्रकः पातुपुत्रान् में सर्वतः प्रभुः।
हाकिनी पुत्रकः पातुदारास्तु लाकिनी सुतः॥७॥
पातु शाकिनिका पुत्रःसैन्यं वै कालभैरवः।
मालिनी पुत्रकः पातुपशूनश्वान् गजास्तथा॥८॥
महाकालोऽवतु क्षेत्रंश्रियं मे सर्वतो गिरा।
वाद्यं वाद्यप्रियः पातुभैरवो नित्यसम्पदा॥९॥

॥ इति तान्त्रोक्त भैरव कवचं सम्पूर्णम् ॥

इस कवच का विशिष्ट महत्व

श्री भैरव कवचम् (Shri Bhairava Kavacham), जो कि एक तांत्रोक्त रचना है, भगवान शिव के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप, भगवान भैरव (Lord Bhairava) का एक रक्षा-मंत्र स्तोत्र है। 'कवच' का अर्थ है 'कवच' या 'सुरक्षा कवच', और यह स्तोत्र साधक को सभी दिशाओं और जीवन के सभी पहलुओं में सुरक्षा प्रदान करने के लिए रचा गया है। इस कवच की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अष्ट भैरवों (Ashta Bhairavas) - असिताङ्ग, रुरु, चण्ड, क्रोधन, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार - का आह्वान करता है, जो आठों दिशाओं के रक्षक हैं। यह स्तोत्र शरीर, मन, परिवार, संपत्ति और सभी कार्यों की रक्षा के लिए भगवान भैरव के विभिन्न रूपों से प्रार्थना करता है, जिससे यह एक संपूर्ण सुरक्षा (complete protection) का साधन बन जाता है।

कवच के प्रमुख भाव और लाभ

इस शक्तिशाली कवच का पाठ करने से साधक को भगवान भैरव की असीम कृपा और अभय प्राप्त होता है:

  • सर्वांगीण सुरक्षा (All-round Protection): यह कवच अष्ट भैरवों द्वारा आठों दिशाओं (पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर, ईशान) के साथ-साथ ऊपर (ऊर्ध्वं) और नीचे (पाताले) से भी रक्षा प्रदान करता है। यह साधक के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र (impenetrable circle of protection) का निर्माण करता है।

  • नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से रक्षा (Protection from Negative Energies and Enemies): भगवान भैरव को भूत-प्रेत और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का अधिपति माना जाता है। इस कवच के पाठ से डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत और अन्य बुरी आत्माओं का भय समाप्त हो जाता है। यह शत्रुओं पर विजय दिलाने में भी सहायक है।

  • पारिवारिक और संपत्ति की सुरक्षा (Protection of Family and Property): स्तोत्र में पुत्र, पत्नी (दारा), सेना, पशु, हाथी, घोड़े और धन-संपत्ति (श्रियं) की रक्षा के लिए भी विशिष्ट प्रार्थनाएं की गई हैं। यह संपूर्ण पारिवारिक कल्याण (complete family welfare) सुनिश्चित करता है।

  • कार्यों में सफलता (Success in All Endeavors): पहला श्लोक ही बटुक भैरव से "सर्वकर्मसु" अर्थात् सभी कार्यों में रक्षा की प्रार्थना करता है। इसके पाठ से व्यक्ति के सभी कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और उसे सफलता (success) प्राप्त होती है।

पाठ करने की विधि और विशेष अवसर

  • इस कवच का पाठ करने के लिए शनिवार (Saturday) और रविवार (Sunday) का दिन, तथा अष्टमी तिथि विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।

  • कालभैरव जयंती (Kalabhairav Jayanti) के दिन इस कवच का पाठ करना अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी होता है।

  • इसका पाठ विशेष रूप से रात्रि के समय करना चाहिए। भगवान भैरव की मूर्ति या चित्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर और उन्हें मीठी रोटी या उड़द के बने व्यंजनों का भोग लगाकर इस कवच का पाठ करें।

  • किसी भी प्रकार के भय, संकट, कानूनी मामलों, या ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं से परेशानी होने पर इस कवच का नियमित पाठ करने से तत्काल राहत मिलती है।