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श्री दुर्गा सप्तशती — सम्पूर्ण चण्डी पाठ (Durga Saptashati)

Sri Durga Saptashati – Complete Chandi Path
श्री दुर्गा सप्तशती — सम्पूर्ण चण्डी पाठ (Durga Saptashati)

श्री दुर्गा सप्तशती (सम्पूर्ण)

दुर्गा सप्तशती शक्ति उपासना का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसमें १, ३ और ५-१३ अध्यायों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा वर्णित है। पाठ की पूर्णता के लिए कवच, अर्गला, कीलक और अंत में सिद्ध कुंजिका का पाठ अनिवार्य माना गया है।

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दुर्गा सप्तशती पाठ विधि (Preliminaries)

३.  सप्तशती पाठ विधि

संकल्प, शापोद्धार और उत्कीलन विधि। पाठ कैसे शुरू करें।

३.१  देवी कवचम्

शरीर के अंगों की रक्षा के लिए सर्वप्रथम पाठ।

३.२  अर्गला स्तोत्रम्

रूपं देहि जयं देहि — कामना पूर्ति और विजय प्राप्ति हेतु।

३.३  कीलकम्

मंत्रों के कीलन को हटाने और शाप-मुक्त करने के लिए।

३.४  वेदोक्तं रात्रि सूक्तम्

ऋग्वेद (१०.१२७) का रात्रि देवी सूक्त।

३.५  तन्त्रोक्तं रात्रि सूक्तम्

विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं — तांत्रिक रात्रि देवी स्तुति।

३.६  श्री देवी अथर्वशीर्षम्

अथर्ववेद का शाक्त उपनिषद — अहं ब्रह्मस्वरूपिणी।

३.७  नवार्ण विधि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे — न्यास, ध्यान और जप।

३.८  सप्तशती न्यासः

करन्यास, अंगन्यास और ध्यान — शरीर को दिव्य शक्ति में रूपांतरित करने की विधि।
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सप्तशती के १३ अध्याय (Chapters 1-13)

"सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥"