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श्री चन्द्र चालीसा - Shree Chandra Chalisa

Shree Chandra Chalisa

श्री चन्द्र चालीसा - Shree Chandra Chalisa
॥ दोहा ॥
जय-जय चंदा! श्री चन्द्रमा,
जय-जय अमृत-अंशु-उजागर।
जयति शशांक! कला-निधि,
तुम हो नित्य सुधा-सागर॥

॥ चौपाई ॥
जय-जय चन्द्र! देव! हितकारी,
जयति निशाकर! शुभ-उजियारी॥
तुमसे रात्रि शोभा पाती,
किरण तुम्हारी मन को भाती॥
क्षीर-सिंधु से तुम उपजाए,
कहे जात हो अत्रि-सुत-आए॥
विष्णु-वाम-दृग-अंश स्वरूपा,
विश्व-मोद-कारक! तव रूपा॥

श्वेत-वर्ण, दस-अश्व-युक्त-रथ,
विचरत नभ में सबके पथ-रथ॥
अमृत-किरणों से मन हरते,
सबकी पीड़ा तुम हर लेते॥
जब तुम उदित गगन में होते,
पुष्प, लता सब हर्षित होते॥
सभी जीव-जंतु सुख पाते,
शीतल-मंद-पवन-लहराते॥

तुम हो सत्ताइस-नक्षत्रेश,
तुम ही हो सब देव-महेश॥
तुम हो सोलह-कला-युक्त-स्वामी,
घटते-बढ़ते अन्तर्यामी॥
जब-जब तुम पूरे हो जाते,
विविध-उत्सव तब हैं मनाते॥
तुम पर जब राहु चढ़ आता,
पूर्ण-ग्रहण जग में कहलाता॥

तुमसे ही सारे व्रत होते,
तेरे बिन सब निष्फल होते॥
तुम हो औषधि-वन के स्वामी,
तुम बिन व्यर्थ सभी फल-कामी॥
तुमसे वर्षा-ऋतु कहलाती,
तुम्हारी कला अन्न उपजाती॥
फसलें तुमसे बल हैं पाती,
धरती पर हरियाली छाती॥

तुम ही पितरों के हो प्यारे,
तुमसे सब हैं भाग्य-सँवारे॥
हो मन के स्वामी तुम देवा,
करते सुर-नर-मुनि सब सेवा॥
रोहिणी-प्रिय, देव! हमारे,
सब संकट-विपदा को टारे॥
जो कोई जपता नाम तुम्हारा,
हर लेते हो सब दुःख सारा॥

रोगी हो या कोई निर्धन,
तुम हर लेते हो सब क्रंदन॥
जिस पर होवे कृपा तुम्हारी,
विपदा उसे न व्यापै भारी॥
जो नर जपता चन्द्र-मंत्र को,
पाता है वह सकल-सुख-तंत्र को॥
जिसकी होवे दशा तुम्हारी,
उसे न कोई चिंता भारी॥

सोमवार का व्रत जो करता,
उसकी तुम पीड़ा सब हरता॥
श्वेत-पुष्प, अक्षत, दधि-मेवा,
करते हैं सब तुम्हारी सेवा॥
चालीसा जो पढ़े-सुनावे,
सब सुख-भोग, परम-पद पावे॥
‘लखि’ दीन की सुनो कहानी,
जय-जय चन्द्रदेव! सुखखानी॥

॥ दोहा ॥
शशि-सुत! ‘बुध’ के पिता हो,
हे शशि! तुम मम-त्राण।
शरणागत की रक्षा करो,
हे अमृत की खान॥

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श्री चन्द्र चालीसा का परिचय एवं महत्व

श्री चन्द्र चालीसा, नवग्रहों में से एक महत्वपूर्ण ग्रह, चन्द्र देव (सोम), को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में, सूर्य को जहाँ आत्मा का कारक माना गया है, वहीं चन्द्रमा को मन का कारक (मनसो जातः) कहा जाता है। वे हमारी भावनाओं, कल्पनाओं, मन की शांति और माता का प्रतिनिधित्व करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र हैं और उनका प्राकट्य समुद्र मंथन से भी माना जाता है। चन्द्र देव को वनस्पतियों और औषधियों का स्वामी ('औषधिपति') भी कहा जाता है, और उनकी शीतल किरणें जीवनदायिनी मानी जाती हैं।

चन्द्र चालीसा पाठ के विस्तृत लाभ

चन्द्र देव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी है। इसके पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
  • मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन (Mental Peace and Emotional Balance): चूंकि चन्द्रमा मन के स्वामी हैं, इस चालीसा का पाठ करने से चिंता, तनाव, अवसाद और मन की चंचलता दूर होती है। यह भावनात्मक स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • रोगों और पीड़ाओं का नाश (Relief from Diseases and Sufferings): "रोगी हो या कोई निर्धन, तुम हर लेते हो सब क्रंदन।" चन्द्र देव को औषधियों का स्वामी माना जाता है, इसलिए उनकी उपासना से स्वास्थ्य लाभ होता है और शारीरिक पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।
  • कुंडली में चंद्र दोष का निवारण (Remedy for Chandra Dosha in Horoscope): जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित होता है, उन्हें अक्सर मानसिक अशांति और निर्णय लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस चालीसा का नियमित पाठ चंद्र ग्रह को मजबूत करता है।
  • सुख-समृद्धि और परम पद की प्राप्ति (Attainment of Prosperity and Liberation): "चालीसा जो पढ़े-सुनावे, सब सुख-भोग, परम-पद पावे।" इसका अर्थ है कि पाठ करने वाला व्यक्ति इस जीवन में सभी सांसारिक सुखों का भोग करता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।

पाठ करने की विधि

  • चन्द्र देव की पूजा और इस चालीसा का पाठ करने का सबसे उत्तम दिन सोमवार (Monday) होता है।
  • इसका पाठ संध्या के समय, चंद्रोदय के बाद करना विशेष फलदायी होता है।
  • स्नान के बाद श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करें और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • पूजा स्थल पर भगवान शिव के साथ चन्द्र देव का ध्यान करें। उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  • उन्हें भोग के रूप में सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल की खीर, सफेद पुष्प, अक्षत और दही अर्पित करें, जैसा कि चालीसा में वर्णित है: "श्वेत-पुष्प, अक्षत, दधि-मेवा"।