जयदेवी जयदेवी जय योगेश्वरी। महिमा न कळे तुझा वर्णिता थोरी॥
धन्य अंबापूर महिमा विचित्र। पार्वती अवतार योगिनी क्षेत्र॥
दंतासुर मर्दानी केले चरित्र। सिद्धांचे स्थळ तें महापवित्र॥१॥
पतितपावन सर्वतीर्थ महाद्वारी। मायामोचन सकळ माया निवारी॥
साधका सिद्धी वाणेच्या तीरीं। तेथील महिमा वर्णूं न शके वैखरी॥२॥
सिद्धलिंग स्थळ परम पावन। नृसिंहतीर्थ तेथे नृसिंहवंदन॥
मूळ पीठ रेणागिरी नांदे आपण। संताचे माहेर गोदेवी स्थान॥३॥
महारुद्र जेथे भैरव अवतार। काळभैरव त्याचा महिमा अपार॥
नागझरी तीर्थ तीर्थांचे सार। मार्जन करिता दोष होती संहार॥४॥
अनंतरूप शक्ती तुज योग्य माते। योगेश्वरी नाम त्रिभुवन विख्याते॥
व्यापक सकळां देहीं अनंत गुण भरिते। निळकंठ ओवाळू कैवल्य माते॥५॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
धन्य अंबापूर महिमा विचित्र। पार्वती अवतार योगिनी क्षेत्र॥
दंतासुर मर्दानी केले चरित्र। सिद्धांचे स्थळ तें महापवित्र॥१॥
पतितपावन सर्वतीर्थ महाद्वारी। मायामोचन सकळ माया निवारी॥
साधका सिद्धी वाणेच्या तीरीं। तेथील महिमा वर्णूं न शके वैखरी॥२॥
सिद्धलिंग स्थळ परम पावन। नृसिंहतीर्थ तेथे नृसिंहवंदन॥
मूळ पीठ रेणागिरी नांदे आपण। संताचे माहेर गोदेवी स्थान॥३॥
महारुद्र जेथे भैरव अवतार। काळभैरव त्याचा महिमा अपार॥
नागझरी तीर्थ तीर्थांचे सार। मार्जन करिता दोष होती संहार॥४॥
अनंतरूप शक्ती तुज योग्य माते। योगेश्वरी नाम त्रिभुवन विख्याते॥
व्यापक सकळां देहीं अनंत गुण भरिते। निळकंठ ओवाळू कैवल्य माते॥५॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Jai Devi Jai Devi Jai Yogeshwari, Mahima na kale tujha varnita thori. ||
Dhanya Ambapur mahima vichitra, Parvati avatar yogini kshetra. ||
Dantasur mardani kele charitra, Siddhanchen sthal ten mahapavitra. ||1||
Patitapavan sarvatirtha mahadvari, Mayamochan sakal maya nivari. ||
Sadhaka siddhi vanechya tirin, Tethil mahima varnun na shake vaikhari. ||2||
Siddhalinga sthal param paavan, Nrisinhatirtha tethe nrisinhavandan. ||
Mul peeth Renagiri nande aapan, Santache maher godevi sthan. ||3||
Maharudra jethe bhairav avatar, Kalbhairav tyacha mahima apaar. ||
Nagjhari tirtha tirthanche saar, Marjan karita dosh hoti sanhar. ||4||
Anantrup shakti tuj yogya mate, Yogeshwari naam tribhuvan vikhyate. ||
Vyapak sakalan dehin anant gun bharite, Nilkanth ovalu kaivalya mate. ||5||
॥ Iti Sampurnam ॥
Dhanya Ambapur mahima vichitra, Parvati avatar yogini kshetra. ||
Dantasur mardani kele charitra, Siddhanchen sthal ten mahapavitra. ||1||
Patitapavan sarvatirtha mahadvari, Mayamochan sakal maya nivari. ||
Sadhaka siddhi vanechya tirin, Tethil mahima varnun na shake vaikhari. ||2||
Siddhalinga sthal param paavan, Nrisinhatirtha tethe nrisinhavandan. ||
Mul peeth Renagiri nande aapan, Santache maher godevi sthan. ||3||
Maharudra jethe bhairav avatar, Kalbhairav tyacha mahima apaar. ||
Nagjhari tirtha tirthanche saar, Marjan karita dosh hoti sanhar. ||4||
Anantrup shakti tuj yogya mate, Yogeshwari naam tribhuvan vikhyate. ||
Vyapak sakalan dehin anant gun bharite, Nilkanth ovalu kaivalya mate. ||5||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"जयदेवी जयदेवी जय योगेश्वरी" यह आरती महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कुलस्वामिनी और शक्तिपीठ, योगेश्वरी माता (Yogeshwari Mata) को समर्पित है, जिनका मुख्य मंदिर अंबेजोगाई (Ambejogai) में स्थित है। योगेश्वरी देवी को माँ पार्वती (Goddess Parvati) का ही एक अवतार माना जाता है। यह आरती देवी की महिमा, उनके द्वारा दंतासुर राक्षस (demon Dantasura) के वध की कथा और उनके पावन क्षेत्र 'अंबापुर' का वर्णन करती है। भक्त अपने जीवन में संकटों से मुक्ति (freedom from obstacles) और सुख-समृद्धि (happiness and prosperity) प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक इस आरती का गायन करते हैं।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
यह आरती देवी योगेश्वरी के विभिन्न स्वरूपों और उनके क्षेत्र की पवित्रता का सुंदर चित्रण करती है:
- दैवीय शक्ति और अवतार (Divine Power and Incarnation): "पार्वती अवतार योगिनी क्षेत्र" अर्थात देवी योगेश्वरी साक्षात पार्वती का अवतार हैं और उनका क्षेत्र योगिनियों का स्थान है।
- विजय की गाथा (Saga of Victory): "दंतासुर मर्दानी केले चरित्र" - इस पंक्ति में देवी द्वारा दंतासुर नामक राक्षस के वध का उल्लेख है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत (victory of good over evil) का प्रतीक है।
- पवित्र स्थानों का वर्णन (Description of Sacred Places): आरती में अंबेजोगाई क्षेत्र के प्रमुख स्थानों जैसे 'नागझरी तीर्थ', 'सिद्धलिंग' और 'नृसिंह तीर्थ' का वर्णन है, जिनके दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
- सर्वव्यापी स्वरूप (Omnipresent Form): "व्यापक सकळां देहीं अनंत गुण भरिते" - हे माता, आप सभी जीवों में व्याप्त हैं और अनंत गुणों से परिपूर्ण हैं।
आरती करने की विधि और विशेष अवसर
- समय (Timing): इस आरती को नित्य पूजा के बाद, विशेषकर मंगलवार और शुक्रवार (Tuesday and Friday) को करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो देवी को समर्पित दिन हैं।
- विशेष उत्सव (Special Occasions): नवरात्रि (Navratri) और दशहरा (Dussehra) के अवसर पर अंबेजोगाई मंदिर और घरों में इस आरती का विशेष महत्व है।
- प्रसाद (Offering): आरती के बाद देवी को 'पूरन पोली' या 'खीर' का नैवेद्य (offering) अर्पित करना पारंपरिक है।
- मनोकामना पूर्ति (Fulfillment of Desires): मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से "जय योगेश्वरी" का जयघोष करते हुए यह आरती गाते हैं, उन्हें आरोग्य (good health) और मानसिक शांति (mental peace) प्राप्त होती है।
