आरती कीजै पंचमुखी हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
पहला मुख पूर्व दिशा में, वानर रूप है विराजे।
लाल लंगोट गदा धारी, भक्तों के काज संवारे॥
दूसरा मुख पश्चिम दिशा में, गरुड़ रूप है सोहे।
पीले वस्त्र गदा धारी, सब देवों को मोहे॥
तीसरा मुख उत्तर दिशा में, वराह रूप है धारे।
श्वेत वस्त्र गदा धारी, भक्तों के दुख टारे॥
चौथा मुख दक्षिण दिशा में, नरसिंह रूप है विराजे।
केसरिया वस्त्र गदा धारी, संकट सब के मिटावे॥
पांचवा मुख ऊपर दिशा में, हयग्रीव रूप है सोहे।
स्वर्ण वस्त्र गदा धारी, सब देवों को मोहे॥
जो कोई पंचमुखी हनुमान की आरती गावे।
सुख संपत्ति घर आवे, मनवांछित फल पावे॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
पहला मुख पूर्व दिशा में, वानर रूप है विराजे।
लाल लंगोट गदा धारी, भक्तों के काज संवारे॥
दूसरा मुख पश्चिम दिशा में, गरुड़ रूप है सोहे।
पीले वस्त्र गदा धारी, सब देवों को मोहे॥
तीसरा मुख उत्तर दिशा में, वराह रूप है धारे।
श्वेत वस्त्र गदा धारी, भक्तों के दुख टारे॥
चौथा मुख दक्षिण दिशा में, नरसिंह रूप है विराजे।
केसरिया वस्त्र गदा धारी, संकट सब के मिटावे॥
पांचवा मुख ऊपर दिशा में, हयग्रीव रूप है सोहे।
स्वर्ण वस्त्र गदा धारी, सब देवों को मोहे॥
जो कोई पंचमुखी हनुमान की आरती गावे।
सुख संपत्ति घर आवे, मनवांछित फल पावे॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Aarti Keejai Panchmukhi Hanuman Lala Ki, Dusht Dalan Raghunath Kala Ki. ||
Pahla Mukh Purva Disha Mein, Vanar Roop Hai Viraje,
Laal Langot Gada Dhari, Bhakton Ke Kaaj Sanvare. ||
Dusra Mukh Paschim Disha Mein, Garud Roop Hai Sohe,
Pile Vastra Gada Dhari, Sab Devon Ko Mohe. ||
Tisra Mukh Uttar Disha Mein, Varaha Roop Hai Dhare,
Shwet Vastra Gada Dhari, Bhakton Ke Dukh Tare. ||
Chautha Mukh Dakshin Disha Mein, Narsingh Roop Hai Viraje,
Kesariya Vastra Gada Dhari, Sankat Sab Ke Mitawe. ||
Panchanva Mukh Upar Disha Mein, Haygreev Roop Hai Sohe,
Swarn Vastra Gada Dhari, Sab Devon Ko Mohe. ||
Jo Koi Panchmukhi Hanuman Ki Aarti Gaave,
Sukh Sampatti Ghar Aave, Manvanchhit Phal Pave. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
Pahla Mukh Purva Disha Mein, Vanar Roop Hai Viraje,
Laal Langot Gada Dhari, Bhakton Ke Kaaj Sanvare. ||
Dusra Mukh Paschim Disha Mein, Garud Roop Hai Sohe,
Pile Vastra Gada Dhari, Sab Devon Ko Mohe. ||
Tisra Mukh Uttar Disha Mein, Varaha Roop Hai Dhare,
Shwet Vastra Gada Dhari, Bhakton Ke Dukh Tare. ||
Chautha Mukh Dakshin Disha Mein, Narsingh Roop Hai Viraje,
Kesariya Vastra Gada Dhari, Sankat Sab Ke Mitawe. ||
Panchanva Mukh Upar Disha Mein, Haygreev Roop Hai Sohe,
Swarn Vastra Gada Dhari, Sab Devon Ko Mohe. ||
Jo Koi Panchmukhi Hanuman Ki Aarti Gaave,
Sukh Sampatti Ghar Aave, Manvanchhit Phal Pave. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
आरती का महत्त्व
"श्री पंचमुखी हनुमान जी की आरती" भगवान हनुमान के उस विराट और शक्तिशाली रूप की स्तुति है, जिसे उन्होंने अहिरावण का वध करने के लिए धारण किया था। यह स्वरूप पांच दिशाओं और पांच तत्वों पर विजय का प्रतीक है।
आरती के मुख्य भाव
- वानर मुख (पूर्व): "पहला मुख पूर्व दिशा में" - यह मुख शत्रुओं पर विजय और पापों के नाश के लिए है।
- गरुड़ मुख (पश्चिम): "दूसरा मुख पश्चिम दिशा में" - यह मुख विष, जादू-टोना और विघ्नों को दूर करता है।
- वराह मुख (उत्तर): "तीसरा मुख उत्तर दिशा में" - यह मुख धन, संपत्ति और ऐश्वर्य प्रदान करता है।
- नृसिंह मुख (दक्षिण): "चौथा मुख दक्षिण दिशा में" - यह मुख भय, चिंता और संकटों का निवारण करता है।
- हयग्रीव मुख (ऊर्ध्व): "पांचवा मुख ऊपर दिशा में" - यह मुख ज्ञान, विद्या और संतान सुख प्रदान करता है।
गायन विधि और अवसर
- अवसर (Occasion): यह आरती हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से गाई जाती है।
- विधि (Method): पंचमुखी हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के समक्ष दीपक जलाकर, पूर्ण भक्ति भाव से इस आरती का गान करें।
