श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो।
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरी सात कोस की परिकम्मा, और चकलेश्वर है विश्राम।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरे गले में कंठा सोहे, तेरी झांकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरी झांकी बनी विशाल, जो नर दर्शन करने आवे।
सो नर बड़े भागशाली, पाप-ताप सब मिट जावे॥
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरी सात कोस की परिकम्मा, और चकलेश्वर है विश्राम।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरे गले में कंठा सोहे, तेरी झांकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
तेरी झांकी बनी विशाल, जो नर दर्शन करने आवे।
सो नर बड़े भागशाली, पाप-ताप सब मिट जावे॥
तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Shri Govardhan Maharaj, Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo.
Tope Paan Chadhe, Tope Phool Chadhe, Tope Chadhe Dudh Ki Dhar.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Teri Saat Kos Ki Parikamma, Aur Chakleshwar Hai Vishram.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Tere Gale Mein Kantha Sohe, Teri Jhanki Bani Vishal.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Teri Jhanki Bani Vishal, Jo Nar Darshan Karne Aave.
So Nar Bade Bhagshali, Paap-Taap Sab Mit Jaave. ||
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
Tope Paan Chadhe, Tope Phool Chadhe, Tope Chadhe Dudh Ki Dhar.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Teri Saat Kos Ki Parikamma, Aur Chakleshwar Hai Vishram.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Tere Gale Mein Kantha Sohe, Teri Jhanki Bani Vishal.
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
Teri Jhanki Bani Vishal, Jo Nar Darshan Karne Aave.
So Nar Bade Bhagshali, Paap-Taap Sab Mit Jaave. ||
Tere Mathe Mukut Biraj Raheyoo. ||
॥ Iti Sampurnam ॥
आरती का महत्त्व
"श्री गोवर्धन महाराज की आरती" ब्रज के रक्षक और भगवान श्री कृष्ण के प्रिय गिरिराज गोवर्धन की स्तुति है। गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के दिन इस आरती का विशेष महत्त्व है।
आरती के मुख्य भाव
- गिरिराज स्वरूप (Form of Giriraj): "तेरे माथे मुकुट बिराज रहेयो" - गिरिराज जी का श्रृंगार एक राजा की भाँति किया जाता है, जिनके मस्तक पर मुकुट और गले में वैजयंती माला सुशोभित है।
- परिक्रमा (Circumambulation): "तेरी सात कोस की परिकम्मा" - गोवर्धन पर्वत की सात कोस (लगभग 21 किलोमीटर) की परिक्रमा का बहुत बड़ा माहात्म्य है।
- भक्त वत्सल (Lover of Devotees): "जो नर दर्शन करने आवे" - जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक गिरिराज जी के दर्शन और परिक्रमा करता है, उसके सभी पाप और संताप मिट जाते हैं।
गायन विधि और अवसर
- अवसर (Occasion): यह आरती गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), कार्तिक मास और ब्रज यात्रा के दौरान प्रतिदिन गाई जाती है।
- विधि (Method): गोवर्धन पर्वत की शिला या प्रतीक रूप में गोबर से गोवर्धन बनाकर, दूध, फूल और नैवेद्य अर्पित कर इस आरती का गान करें।
