आरती रामदासा। भक्त विरक्त ईशा॥
उगवला ज्ञानसूर्य। उजळोनी प्रकाशा॥
साक्षात् शंकराचा। अवतार मारुती॥
कलिमाजीं तेचि जाली। रामदासाची मूर्ती॥१॥
वीसही दशकांचा। दासबोध ग्रंथ केला॥
जडजीवां उद्धरीलें। नृप शिवासी तारिलें॥२॥
ब्रह्मचर्य व्रत ज्याचें। रामरूप सृष्टि पाहे॥
कल्याण तिहीं लोकीं। समर्थ सद्गुरुपाय॥३॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
उगवला ज्ञानसूर्य। उजळोनी प्रकाशा॥
साक्षात् शंकराचा। अवतार मारुती॥
कलिमाजीं तेचि जाली। रामदासाची मूर्ती॥१॥
वीसही दशकांचा। दासबोध ग्रंथ केला॥
जडजीवां उद्धरीलें। नृप शिवासी तारिलें॥२॥
ब्रह्मचर्य व्रत ज्याचें। रामरूप सृष्टि पाहे॥
कल्याण तिहीं लोकीं। समर्थ सद्गुरुपाय॥३॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Aarti Ramdasa, Bhakt Virakta Isha. ||
Ugavala Jnan Surya, Ujaloni Prakasha. ||
Sakshat Shankaracha, Avatar Maruti. ||
Kalimajin Techi Jaali, Ramdasachi Murti. ||1||
Visahi Dashakancha, Dasbodh Granth Kela. ||
Jadjivan Uddharilen, Nrip Shivasi Tarilen. ||2||
Brahmacharya Vrat Jyachen, Ramrup Srishti Pahe. ||
Kalyan Tihin Lokin, Samarth Sadgurupay. ||3||
॥ Iti Sampurnam ॥
Ugavala Jnan Surya, Ujaloni Prakasha. ||
Sakshat Shankaracha, Avatar Maruti. ||
Kalimajin Techi Jaali, Ramdasachi Murti. ||1||
Visahi Dashakancha, Dasbodh Granth Kela. ||
Jadjivan Uddharilen, Nrip Shivasi Tarilen. ||2||
Brahmacharya Vrat Jyachen, Ramrup Srishti Pahe. ||
Kalyan Tihin Lokin, Samarth Sadgurupay. ||3||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"आरती रामदासा" महान संत समर्थ रामदास स्वामी (Samarth Ramdas Swami) को समर्पित है। उन्हें भगवान हनुमान (Hanuman) का अवतार माना जाता है। यह आरती उनके त्याग, ज्ञान और भक्ति की महिमा का गुणगान करती है।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
- ज्ञान सूर्य (Sun of Knowledge): "उगवला ज्ञानसूर्य" - उनका जन्म अज्ञान के अंधकार को मिटाने वाले ज्ञान के सूर्य के उदय के समान है। वे आत्मज्ञान (Self-Knowledge) के प्रकाश पुंज हैं।
- हनुमान अवतार (Avatar of Hanuman): "साक्षात् शंकराचा अवतार मारुती" - वे साक्षात भगवान शंकर के अंश और मारुति (हनुमान) के अवतार हैं, जो कलयुग में धर्म की रक्षा के लिए आए।
- दासबोध (Dasbodh): "वीसही दशकांचा दासबोध ग्रंथ केला" - उन्होंने 'दासबोध' जैसे महान ग्रंथ की रचना की जो मानव मात्र का कल्याण करता है और मोक्ष (Salvation) का मार्ग दिखाता है।
पौराणिक संदर्भ (Mythological Context)
समर्थ रामदास स्वामी छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने "जय जय रघुवीर समर्थ" का नारा दिया और समाज में धर्म और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई।
आरती/पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
- विशेष अवसर (Special Occasions): यह आरती दास नवमी (Das Navami), गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) और प्रत्येक गुरुवार को गाई जाती है।
- विधि (Method): आरती करते समय गुरु के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव रखें और उनसे ज्ञान और भक्ति की याचना करें।
