रत्नांची कुंडलें माला सुविराजे।
झळझळ गंडस्थळ घननीळ तनू साजे॥
घंटा किंकिणि अंबर अभिनव गति साजे।
अंदु वांकी तोडर नुपुर ब्रीद गाजे॥१॥
जय देव जय देव जय रघुवर ईशा।
आरती निर्जरवर ईशा जगदीशा॥
राजिव लोचन मोचन सुरवर नरनारी।
परातपर अभयंकर शंकर वरधारी॥
भूषणमंडित उभा त्रिदश कैवारी।
दासा मंडण खंडण भवभय अपहारी॥२॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
झळझळ गंडस्थळ घननीळ तनू साजे॥
घंटा किंकिणि अंबर अभिनव गति साजे।
अंदु वांकी तोडर नुपुर ब्रीद गाजे॥१॥
जय देव जय देव जय रघुवर ईशा।
आरती निर्जरवर ईशा जगदीशा॥
राजिव लोचन मोचन सुरवर नरनारी।
परातपर अभयंकर शंकर वरधारी॥
भूषणमंडित उभा त्रिदश कैवारी।
दासा मंडण खंडण भवभय अपहारी॥२॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥
Ratnanchi kundalen maala suviraje,
Jhalajhal gandasthal ghananil tanu saje. ||
Ghanta kinkini ambar abhinav gati saje,
Andu vanki todar nupur brid gaje. ||1||
Jai Dev Jai Dev Jai Raghuvar Isha,
Aarti nirjaravar isha jagadisha. ||
Rajiv lochan mochan suravar naranari,
Paratpar abhayankar shankar varadhari. ||
Bhushanmandit ubha tridash kaivari,
Dasa mandan khandan bhavabhay apahari. ||2||
॥ Iti Sampurnam ॥
Jhalajhal gandasthal ghananil tanu saje. ||
Ghanta kinkini ambar abhinav gati saje,
Andu vanki todar nupur brid gaje. ||1||
Jai Dev Jai Dev Jai Raghuvar Isha,
Aarti nirjaravar isha jagadisha. ||
Rajiv lochan mochan suravar naranari,
Paratpar abhayankar shankar varadhari. ||
Bhushanmandit ubha tridash kaivari,
Dasa mandan khandan bhavabhay apahari. ||2||
॥ Iti Sampurnam ॥
इस आरती का विशिष्ट महत्व
"रत्नांची कुंडलें" आरती भगवान राम के राजसी स्वरूप (Royal Form) और उनके दिव्य अलंकारों का वर्णन करती है। यह आरती भक्त को भगवान के सगुण साकार रूप के दर्शन कराती है, जिसमें वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर हैं।
आरती के प्रमुख भाव और अर्थ
- दिव्य अलंकार (Divine Ornaments): "रत्नांची कुंडलें माला सुविराजे" - भगवान के कानों में रत्नों के कुंडल और गले में माला सुशोभित है। यह उनके ऐश्वर्य (Opulence) का प्रतीक है।
- भय हारी (Remover of Fear): "खंडण भवभय अपहारी" - भगवान राम संसार के भय का खंडन (नाश) करने वाले हैं। उनकी शरण में आने से भक्त निर्भय हो जाता है।
- शरणागति (Surrender): "दासा मंडण" - वे अपने दासों (भक्तों) के आभूषण और रक्षक हैं। यह पंक्ति पूर्ण शरणागति (Surrender) का भाव जगाती है।
पौराणिक संदर्भ (Mythological Context)
इस आरती में भगवान राम को रघुवर ईशा (Raghuvar Isha) और जगदीशा (Lord of the Universe) कहा गया है। इसमें उनके द्वारा राक्षसों के संहार ("त्रिदश कैवारी") और भक्तों की रक्षा का संकेत है।
आरती/पाठ करने की विधि और विशेष अवसर
- विशेष अवसर (Special Occasions): यह आरती दशहरा (Dussehra), राम नवमी (Ram Navami) और विशेष पूजा के अंत में गाई जाती है।
- विधि (Method): आरती करते समय भगवान के राजसी रूप का ध्यान करें और मन में यह भाव रखें कि वे हमारे सभी भयों का नाश कर रहे हैं।
