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श्रीदेवीजी की आरती (मोहिनी रूप)

Shree Deviji Ki Aarti (Mohini Roop)

श्रीदेवीजी की आरती (मोहिनी रूप)
जय जय जय देवि जयति जय, जय मोहिनिरूपे।
मामिह जननि समुद्धर पतितं भवक्रूपे॥

प्रवरतीरनिवासिनि निगमप्रतिपाद्ये।
पापवारिविहारिणि नारायण गुण हो।
प्रपन्नसारे जगदाधारे श्रीविद्यो।
प्रपन्नपालननिरते मुनिवृन्दाराध्ये॥

दिव्यसुधाकरवदने कुन्दोज्ज्वलरदने।
पदनखनर्जितमदने मधुकैटभकदने।
विकसितपङ्कज नयने पत्रगपतीशयने।
खगपतिवहने गहने सङ्कटवन्दने॥

मञ्जीरान्नितचरणे मणिमुक्ताभरणे।
कञ्चुकि वस्त्रवरणे वक्त्रांबुजधरने।
शकाम्बु भयभयहरणे भसुरसुखकरणे।
करुणां कुरु मे शरणे गजनक्रोद्धरणे॥

छित्वा राहुग्रीवां पासि त्वं विबुधान्
ददासि मृत्युमनिशं पीयूषं विबुधान्।
विहरसि दानववक्रद्वान समरे संसिद्वान
मध्यमुनिवरवदे पालय संसिद्वान॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

मोहिनी अवतार का महत्व

"जय मोहिनिरूपे" आरती भगवान विष्णु के एकमात्र स्त्री अवतार, मोहिनी (Mohini) को समर्पित है। समुद्र मंथन के समय अमृत कलश को असुरों से बचाने और देवताओं में अमृत वितरण करने के लिए भगवान विष्णु ने यह अत्यंत सुंदर और मोहक रूप धारण किया था।

आरती के प्रमुख प्रसंग और लाभ

इस आरती में मोहिनी अवतार की लीलाओं का वर्णन है:

  • अमृत वितरण (Distribution of Nectar): "ददासि मृत्युमनिशं पीयूषं विबुधान्" - उन्होंने देवताओं (विबुधान्) को अमृत (पीयूष) पिलाकर अमर कर दिया।
  • राहु का वध (Slaying of Rahu): "छित्वा राहुग्रीवां" - जब राहु ने छल से अमृत पिया, तो मोहिनी रूप में भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया।
  • माया और मोह का नाश (Removal of Illusion): मोहिनी रूप माया का प्रतीक है, लेकिन उनकी भक्ति माया के बंधन से मुक्त भी करती है।
  • शत्रु विजय (Victory over Enemies): मोहिनी अवतार ने बिना युद्ध किए ही असुरों को परास्त कर दिया था।

पूजन विधि

  • मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi): वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा का विशेष विधान है।
  • भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान से मोह-माया के बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
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