Logoपवित्र ग्रंथ

श्रीदेवीजी की आरती

Shree Deviji Ki Aarti (Jagjanani)

श्रीदेवीजी की आरती
जय जय जय, जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि।
भक्ति-मुक्ति-दायिनि भयहरणि कालिका॥

मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्वशर्वरीश-वदनि,
ताप-तिमिर तरूण-तरणि-किरणमालिका॥

वर्म-चर्म-कर-कृपाण शूल-शेल-धनुष-बाण
धरणि, दलनि दानव-दल, रण-करालिका।

पूतना-पिशाच-प्रेत डाकिनि-शाकिनि-समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि-जालिका॥

जय महेश-भामिनि अनेक-रूप-नामिनि,
समस्त-लोक-स्वामिनी हिमशैल-बालिका।

रघुपति-पद परम प्रेम, तुलसी यह अचल नेम,
देहु है प्रसर पाहि प्रनतपालिका॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

श्रीदेवीजी (जगजननी) का महत्व

"जय जय जय, जगजननि देवि" आरती गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित मानी जाती है। यह आरती माँ जगजननी (Mother of the Universe), जो कि शक्ति का सर्वोच्च रूप हैं, की स्तुति है। इसमें देवी को असुरों का नाश करने वाली और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली बताया गया है।

आरती के प्रमुख भाव और लाभ

इस आरती के गायन से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय और संकट से मुक्ति (Removal of Fear): "भयहरणि कालिका" - देवी माँ अपने भक्तों के सभी प्रकार के भय, विशेषकर मृत्यु के भय को दूर करती हैं।
  • शत्रु नाश (Destruction of Enemies): "दलनि दानव-दल, रण-करालिका" - वे दुष्ट शक्तियों और आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ) का नाश करती हैं।
  • भक्ति और मुक्ति (Devotion and Liberation): "भक्ति-मुक्ति-दायिनि" - वे अपने भक्तों को अनन्य भक्ति और अंततः मोक्ष प्रदान करती हैं।
  • समस्त लोकों की स्वामिनी (Ruler of All Worlds): "समस्त-लोक-स्वामिनी हिमशैल-बालिका" - वे तीनों लोकों की स्वामिनी होते हुए भी हिमालय की पुत्री (पार्वती) के रूप में वात्सल्यमयी हैं।

पूजन विधि

  • नवरात्रि (Navratri) के नौ दिनों में इस आरती का विशेष महत्व है।
  • शुक्रवार (Friday) को देवी माँ की विशेष पूजा की जाती है।
  • लाल फूल (गुड़हल), कुमकुम, और चुनरी अर्पित करके माँ की आराधना की जाती है।
Back to aartis Collection