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शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

Shendur Lal Chadhayo Aarti

शेंदुर लाल चढ़ायो आरती
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को ।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को ।
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवर को ।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को ॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ जय देव जय देव ॥

अष्टौ सिद्धि दासी संकट को बैरी ।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।
कोटी सूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी ।
गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबहारी ॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ जय देव जय देव ॥

भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतति संपत्ति सबहि भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे ॥
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ॥ जय देव जय देव ॥

इस आरती का विशिष्ट महत्व

"शेंदुर लाल चढ़ायो" भगवान गणेश (Lord Ganesha) को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय आरती है, जिसकी रचना 17वीं शताब्दी के महान संत समर्थ रामदास (Samarth Ramdas) ने की थी। यह आरती मुख्य रूप से महाराष्ट्र और आस-पास के क्षेत्रों में बहुत प्रसिद्ध है और इसे अक्सर "सुखकर्ता दुःखहर्ता" आरती के तुरंत बाद गाया जाता है। इसकी भाषा मराठी और हिंदी (ब्रजभाषा) का एक सुंदर मिश्रण है। इस आरती का केंद्र बिंदु 'शेंदुर' अर्थात सिंदूर (vermilion) है, जो भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। सिंदूर चढ़ाना मंगल, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और यह आरती उसी भाव को व्यक्त करती है।

आरती के प्रमुख भाव और अर्थ

यह आरती भगवान गणेश के स्वरूप और महिमा का अद्भुत वर्णन करती है:

  • गजमुख का दिव्य श्रृंगार (Divine Adornment of Gajmukh): आरती की पहली पंक्ति "शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को" भगवान गणेश के हाथी-मुख पर सुंदर लाल सिंदूर के लेप का वर्णन करती है। यह उनके तेजस्वी और मंगलकारी रूप को दर्शाता है, जो भक्तों के जीवन में शुभता (auspiciousness) लाता है।
  • विद्या और सुख के दाता (Giver of Knowledge and Happiness): "जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता" पंक्ति में गणेश जी को विद्या (ज्ञान) और सुख का दाता कहा गया है। वह बुद्धि के देवता हैं, और उनकी कृपा से जीवन में ज्ञान और सफलता (knowledge and success) प्राप्त होती है।
  • अष्टसिद्धि के स्वामी (Master of the Eight Siddhis): "अष्टौ सिद्धि दासी संकट को बैरी" का अर्थ है कि आठों दिव्य सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा आदि) आपकी दासी हैं और आप सभी संकटों के शत्रु हैं। यह उन्हें विघ्नविनाशक (remover of obstacles) के रूप में स्थापित करता है।
  • शरणागत के पालक (Protector of the Devotees): अंतिम पद में संत रामदास (गोसावीनंदन) कहते हैं कि जो भी भाव-भक्ति से आपकी शरण में आता है, उसे आप संतति और संपत्ति से परिपूर्ण कर देते हैं। यह भगवान गणेश की अपने भक्तों के प्रति करुणा और उदारता को दर्शाता है।

आरती करने की विधि और विशेष अवसर

  • यह आरती विशेष रूप से गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) महोत्सव के दौरान दस दिनों तक सुबह-शाम गाई जाती है।
  • प्रत्येक बुधवार (Wednesday), जो भगवान गणेश का दिन माना जाता है, को इस आरती का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • आरती करते समय भगवान गणेश को लाल सिंदूर, लाल फूल (विशेषकर गुड़हल), और दूर्वा (Durva grass) अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • इस आरती का नियमित गान करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि (happiness and prosperity) का वास होता है।
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