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मां मनसा देवी की आरती (जय मनसा देवी)

Maa Manasa Devi Aarti

मां मनसा देवी की आरती (जय मनसा देवी)
जय मनसा देवी, मैया जय मनसा देवी।
तुम ही हो पालनकर्ता, तुम ही सुख देती॥
जय मनसा देवी...॥

वासुकी की बहिन, तुम ही हो नागों की माता।
विष हरण करती, भक्तों का उद्धार करती॥
जय मनसा देवी...॥

जगत जननी तुम हो, तुम ही हो विश्व विधाता।
जो कोई प्रेम से गाता, मनवांछित फल पाता॥
जय मनसा देवी...॥

पंचमी तिथि को पूजें, भक्तों की हो भीड़।
पुष्प और नैवेद्य चढ़ाकर, होते सब सिद्ध॥
जय मनसा देवी...॥

आरोग्य धन प्रदाता, हर रोग दोष मिटाती।
जो कोई प्रेम से गाता, सब पाप धुल जाते॥
जय मनसा देवी...॥

नारद ब्रह्मा शंकर, आरती तेरी है गाते।
जो कोई प्रेम से गाता, मनवांछित फल पाता॥
जय मनसा देवी...॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

इस आरती का विशिष्ट महत्व

माँ मनसा देवी, जिन्हें 'नागिनी' या 'विषहरी' (विष को हरने वाली) के रूप में भी जाना जाता है, सर्पों की देवी हैं। उनकी पूजा मुख्य रूप से बंगाल, झारखंड, और भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में प्रचलित है, खासकर मानसून के मौसम में जब सर्पों का भय अधिक होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे नागराज वासुकी की बहन और महर्षि कश्यप की पुत्री हैं। कुछ परंपराओं में उन्हें भगवान शिव की मानस पुत्री भी माना जाता है। माँ मनसा की आरती का पाठ भक्तों को सर्प दंश के भय से मुक्ति (protection from snakebites) और सभी प्रकार के विषों से रक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, देवी की कृपा से भक्तों को आरोग्य, धन, और संतान सुख (fertility and prosperity) की भी प्राप्ति होती है।

आरती के प्रमुख भाव और अर्थ

यह आरती माँ मनसा देवी के करुणामयी और शक्तिशाली स्वरूप का गुणगान करती है:

  • नागों की माता (Mother of the Serpents): "वासुकी की बहिन, तुम ही हो नागों की माता" - यह पंक्ति देवी के नागों पर पूर्ण अधिकार को दर्शाती है। नागराज वासुकी की बहन होने के नाते, वे सभी सर्पों की पूजनीय और शासक हैं, और उनकी कृपा से सर्प भय दूर होता है।
  • विष का हरण करने वाली (Remover of Poison): "विष हरण करती, भक्तों का उद्धार करती" - यह माँ का सबसे प्रमुख गुण है। वे न केवल सर्प विष जैसे भौतिक विषों को हरती हैं, बल्कि जीवन के आध्यात्मिक विषों - जैसे क्रोध, घृणा, और ईर्ष्या - को भी नष्ट कर भक्तों का उद्धार करती हैं।
  • मनोकामना पूर्ण करने वाली (Fulfiller of Wishes): "जो कोई प्रेम से गाता, मनवांछित फल पाता" - यह पंक्ति भक्तों को आश्वासन देती है कि जो कोई भी सच्चे हृदय और प्रेम से माँ की स्तुति करता है, देवी उसकी सभी उचित मनोकामनाओं को पूरा करती हैं और जीवन में सफलता (success in life) प्रदान करती हैं।
  • आरोग्य और धन की प्रदाता (Giver of Health and Wealth): "आरोग्य धन प्रदाता, हर रोग दोष मिटाती" - माँ मनसा की पूजा से न केवल सर्प भय, बल्कि अन्य प्रकार के रोग और दोष भी समाप्त हो जाते हैं। वे अपने भक्तों को एक स्वस्थ और समृद्ध जीवन (healthy and wealthy life) का आशीर्वाद देती हैं।

आरती करने की विधि और विशेष अवसर

  • माँ मनसा की पूजा के लिए नाग पंचमी (Nag Panchami) का दिन सबसे शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, श्रावण और भाद्रपद मास में भी उनकी विशेष पूजा की जाती है।
  • पूजा के दौरान माँ को दूध, केले, मिठाई और फूल अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर मिट्टी के साँप और बर्तन चढ़ाने की भी परंपरा है।
  • इस आरती का नियमित पाठ करने से घर में सर्प और अन्य विषैले जीवों का भय नहीं रहता और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • जिन लोगों की कुंडली में सर्प दोष या कालसर्प दोष होता है, उनके लिए माँ मनसा की आरती का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक प्रभावों (negative energy) को कम करने में मदद करता है।
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